पॉज़िटिव पेरेंटिंग : माता पिता और बच्चों का रिश्ता

जब पारिवारिक जीवन की बात आती है, तो हर कोई यह जानने का प्रयास करता है कि माता-पिता और बच्चों के बीच का संबंध कैसे आदर्श बन सकता है। पॉज़िटिव (सकारात्मक) पेरेंटिंग तकनीक बच्चों को अच्छे नैतिक मूल्यों और नीति-नियम के साथ उनका विकास हो सके इस तरह से काम करती है और हर माता-पिता का भी यही सपना रहता है। हालांकि, यह उपलब्धि इतनी आसान नहीं है और यह जानना महत्वपूर्ण है कि माता-पिता के उनके बच्चों के बिच का संबंध दो-तरफा सड़क की तरह है, दूसरे शब्दों में, यह वास्तव में एक माता-पिता और उनके बच्चें के बीच एक साझेदारी है।

जैसे विविध रंगोवाले फूलों से एक बगीचा सुंदर दिखाई देता है। इसी तरह, अगर माता-पिता सीखते हैं कि कैसे एक 'माली' की तरह अपने बच्चें के व्यक्तित्व को पहचाने और उसे पोषण देने में सक्षम बने, तो उनका 'गार्डन' सुगंधित हो जाएगा! यह सभी पॉज़िटिव (सकारात्मक) पेरेंटिंग की और निर्देश करता है!

जब माता-पिता प्रभावी पेरेंटिंग का कौशल विकसित करते हैं, तो वे पीढ़ी अंतराल (जनरेशन गेप) को मिटाने में सक्षम होते हैं। जब माता-पिता इस बात को समझने लगते हैं कि किन चीजों में मर्यादा रखी जाए, कहां प्रोत्साहित किया जाए और कहाँ अंकुश रखा जाए, तो उनके बच्चें बिगड़ेंगे नहीं। इस तरह वे अच्छे माता-पिता बन सकते हैं। जब लोग यह नहीं जानते कि एक अच्छे माता-पिता कैसे बनें, तो दोनों के बीच दूरियाँ विकसित होती है।

परम पूज्य दादा भगवान कहते है कि,“इस हिन्दुस्तान का एक बच्चा सारे विश्व का बोझ उठा सके, इतनी शक्ति का धनी है। सिर्फ उसे पुष्टि देने की ज़रूरत है|”, सच्ची समझ के साथ, युवावर्ग भी अपने माता-पिता के साथ अपने रिश्तें को मजबूत कर सकते हैं।

आज के युवाओं को संपूर्ण समझ प्रदान करने के उद्देश्य के साथ, परम पूज्य दादा भगवान ने, बाल्य और किशोर अवस्था के दोनो वर्गों अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रगति कर सकें इस हेतु से शुद्ध प्रेम और समता के साथ उनका कैसे विकास किया जाए, यह मार्गदर्शन प्रदान किया है। नैतिक मूल्यों, अच्छे शिष्टाचार और अनुशासन लिए पॉज़िटिव पेरेंटिंग संबंधित उन्होंने उत्कृष्ट समाधान दिए हैं, जो युवावस्था के दौरान भी काम आते हैं।

इन प्रभावी पेरेंटिंग टिप्स का उपयोग करके एक बेहतर पेरेंट बनने की स्पष्ट समझ पाने के लिए आगे पढ़ें।

माता-पिता और बच्चों के संबंध

माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव होना यह आम बात है| इस विडियो में पूज्य नीरूमाँ, बच्चों को कैसे प्यार और स्नेह से सँभाले, उसकी चाबियाँ देते हैं|

Top Questions & Answers

  1. Q. बच्चों के विकास में माता-पिता की भूमिका क्या है?

    A. अपने पहले बच्चे की परवरिश के समय हम इतने पारंगत नहीं होते | जब आप अपने बच्चे की पसंद और नापसंद के... Read More

  2. Q. बच्चों को नैतिक मूल्य कैसे सिखाएँ?

    A. प्रश्नकर्ता: यहाँ अमरीका में पैसा है, लेकिन संस्कार नहीं हैं और यहाँ आसपास का वातावरण ही ऐसा है, तो... Read More

  3. Q. बच्चों को पढ़ाई-लिखाई के संबंधित मार्गदर्शन कैसे दें?

    A. एक भाई मुझसे कहता है, मेरा भतीजा हर रोज़ नौ बजे उठता है। घर में कोई काम नहीं करता। फिर घर के सभी... Read More

  4. Q. जब बच्चे गलतियाँ करें, तब उन्हें कैसे समझाएँ?

    A. प्रश्नकर्ता: उनकी भूल होती हो तो टोकना तो पड़ेगा न? दादाश्री: तब आपको उनसे ऐसा पूछना चाहिए कि यह... Read More

  5. Q. अवज्ञाकारी बच्चों के साथ कैसा व्यव्हार करें?

    A. एक बाप कहता है, ‘ये सारे बच्चे मेरे विरोधी हो गए हैं।’ मैंने कहा, ‘आपमें योग्यता नहीं यह स्पष्ट हो... Read More

  6. Q. अनुशासन और शिष्टाचार के सहित बच्चों का लालन-पालन कैसे करें?

    A. अगर हम मांसाहार न करें, शराब न पीएँ और घर में पत्नी के साथ झगड़ा न करें तो बच्चे देखते हैं कि... Read More

  7. Q. बच्चों को चोरी करने से कैसे रोकें?

    A. प्रश्नकर्ता: हमें कुछ कहना न हो, लेकिन मान लीजिए कि हमारा बेटा चोरी करता हो तो क्या चोरी करने... Read More

  8. Q. बच्चों को सुधारने के लिए क्या करना चाहिए?

    A. यह किट-किट करने के बजाय मौन रहना अच्छा, नहीं बोलना अच्छा। बच्चे सुधरने के बजाय बिगड़ते हैं, इसलिए... Read More

  9. Q. अपनी युवा बेटी के साथ कैसा व्यवहार करें?

    A. एक आदमी मेरे पास आता था। उसकी एक बेटी थी। उसे मैंने पहले से समझाया था कि ‘यह तो कलियुग है, इस... Read More

  10. Q. बच्चों को विरासत में क्या देना चाहिए?

    A. इसलिए बेटे को तो सिर्फ क्या देना चाहिए, एक ‘फ्लैट’ (मकान) देना, हम रहते हैं वह। वह भी हो तो देना।... Read More

  11. Q. माता–पिता और बच्चों के बीच का संबंध कैसे मज़बूत करें?

    A. जो व्यक्ति माता-पिता के दोष देखता है, उसमें कभी भी बऱकत नहीं हो सकती। संभव है पैसेवाला हो, लेकिन... Read More

Spiritual Quotes

  1. ये बच्चे अपना आईना हैं। अपने बच्चों पर से पता चलता है कि अपनी कितनी गलतियाँ हैं!
  2. बढे़-घटे, वह आसक्ति कहलाती है। जो बढे़-घटे नही वह परमात्म-प्रेम है।
  3. मारने से जगत् नहीं सुधरता। डाँटने से या चिढ़ने से भी कोई नहीं सुधरता। सही करके दिखाने से सुधरता है। जितना बोलें उतना पागलपन है।
  4. इस हिन्दुस्तान का एक बच्चा सारे विश्व का बोझ उठा सके, इतनी शक्ति का धनी है। सिर्फ उसे पुष्टि देने की ज़रूरत है। ये तो भक्षक निकले! भक्षक यानी अपने सुख के लिए जो दूसरों को सभी तरह से लूट लें। जो खुद के सुख का त्याग करके बैठा है, वही दूसरों को समस्त सुख दे सकता है।
  5. बच्चा अपने संस्कार लेकर ही आता है। उसमें तुम्हें मदद कर के उन संस्कारों को रंग देने की ज़रूरत है।
  6. बच्चों के लिए अच्छी भावना करते रहो। सभी अच्छे संयोग आ मिलेंगे। नहीं तो इन बच्चों में कोई सुधार होनेवाला नहीं है। बच्चे सुधरेंगे, लेकिन अपने आप कुदरत सुधारेगी।
  7. जिस दिन से बच्चों के साथ आपकी झिक-झिक बंद हो जाएगी, उस दिन से बच्चे सुधरने लगेंगे। आपके शब्द अच्छे निकलते नहीं, इसलिए सामनेवाला अकुलाता है। आपके शब्द स्वीकार नहीं होते और उल्टे वे शब्द पलटकर वापस आते हैं।
  8. जबकि माता-पिता उसे अपने जैसा बनाना चाहते हैं। अरे, उसे खिलने दो, उसकी शक्तियाँ क्या हैं? उसे खिलने दो। किसका स्वभाव कैसा है, वह देख लेना है।
  9. तुम ऐसा बोलो कि बच्चों को तुम्हारी बातों में इन्टरेस्ट (रुचि)आये, तब वे तुम्हारा कहा हुआ करेंगे ही।
  10. माता-पिता तो वे कहलाते हैं कि अगर बेटा बुरी लाईन पर चला गया हो, फिर भी एक दिन जब माता-पिता कहें, ‘बेटा, यह हमें शोभा नहीं देता, यह तूने क्या किया?’ तो दूसरे दिन सब बंद कर दे। ऐसा प्रेम है ही कहाँ? यह तो बगैर प्रेम के माता-पिता! यह जगत् प्रेम से ही वश होता है।

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