निजदोष दर्शन से निर्दोष

"दूसरों के दोष देखने से कर्म बँधन होता है और खुद के दोष देखने से कर्मों से मुक्ति मिलती है।" यह कर्म का सिद्धांत है।

अपने खुद के स्वरूप की अज्ञानता ही सबसे बड़ी भूल है। "मैं कौन हूँ?" यह अज्ञान ही सभी दोषों का मूल कारण है?

ज्ञानीपुरुष के आर्शीवाद से यह दोष भस्मीभूत हो जाता है और परिणाम स्वरूप बाकी के सभी दोष भी खत्म होने लगते हैं।

जब तक व्यक्ति को आत्माज्ञान प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक वह सभी में दोष देखता है और खुद के दोष कभी नहीं देख सकता।

आत्मज्ञान प्राप्ति के बाद में आपको अपने मन-वचन-काया के प्रति पक्षपात नहीं रहता और ऐसी निष्पक्षपाती दृष्टि के परिणाम स्वरूप आप खुद के दोष देख सकते हैं।

निजदोष दर्शन से निर्दोष

जो चीज़ एक व्यक्ति के हिसाब से सही है वही चीज़ दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण से गलत हो सकती है|उत्तम यहि है की दूसरों की गलतियाँ ढूँढना टाले|

Top Questions & Answers

  1. Q. क्या इस संसार में होनेवाली हरएक चीज़ के लिए भगवान ज़िम्मेदार हैं?

    A. लोग मानते हैं कि भगवान ऊपरी हैं, इसलिए उनकी भक्ति करेंगे तो छूट जाएँगे। पर नहीं, कोई बाप भी ऊपरी... Read More

  2. Q. संसार में इतना दुःख और पीड़ा क्यों है?

    A. दुःख सब नासमझी का ही है इस जगत् में। दूसरा कोई भी दुःख है, वह सब नासमझी का ही है। खुद ने खड़ा किया... Read More

  3. Q. मुझे दूसरों के दोष क्यों दिखते हैं?

    A. प्रश्नकर्ता : मुझे सामनेवाले मनुष्य के गुण के बजाय दोष अधिक दिखते हैं, उसका क्या कारण है? दादाश्री... Read More

  4. Q. मैं अपनी बुद्धि पर कैसे काबू रखूँ, क्योंकि यह मुझे दूसरों के दोष दिखाती रहती है?

    A. प्रश्नकर्ता : मतलब दूसरों का दोष नहीं, हमारा ही दोष है? दादाश्री : हाँ, ऐसा है न, बुद्धि को एक जगह... Read More

  5. Q. ज्ञानी की निर्दोष दृष्टि।

    A. आपके दोष भी हमें दिखते हैं, पर हमारी दृष्टि शुद्धात्मा की तरफ होती है, उदयकर्म की तरफ दृष्टि नहीं... Read More

  6. Q. ज्ञानी की तत्व दृष्टि।

    A. कोई व्यक्ति अगर खुद की एक भूल भी खत्म करे, तो वो भगवान कहा जाएगा। ऐसे बहुत लोग हैं, जो आपकी गलतियाँ... Read More

  7. Q. आत्मज्ञान क्या है?

    A. 'स्वरूपज्ञान' बिना तो भूल दिखती नहीं है। क्योंकि 'मैं ही चंदूभाई हूँ और मुझ में कोई दोष नहीं है,... Read More

  8. Q. आत्मज्ञान प्राप्ति के लक्षण क्या है?

    A. यह ज्ञान लेने के बाद बाहर का तो आप देखोगे वह अलग बात है, पर आपके ही अंदर का आप सब देखा करोगे, उस... Read More

  9. Q. आत्मज्ञान प्राप्ति के बाद में दोषों को खत्म कैसे करें?

    A. मन-वचन-काया से प्रत्यक्ष दादा भगवान की साक्षी में क्षमा माँगते रहना। हर कदम पर जागृति रहनी चाहिए।... Read More

  10. Q. मोक्ष कैसे प्राप्त करें?

    A. इस जगत् में कोई भी मनुष्य आपका कुछ भी नुकसान करता है, उसमें वह निमित्त है। नुकसान आपका है, इसलिए... Read More

Spiritual Quotes

  1. टीका करनी यानी दस का करना एक! शक्तियाँ व्यर्थ होती हैं और नुक़सान होता है!
  2. जगत् सारा स्वतंत्र है। आपकी भूलें ही आपकी ऊपरी हैं बस, हमारी भूलें होती हैं वे ही! भूलें और ब्लंडर्स!!! यानी आपकी भूल नहीं हो तो कोई आपका नाम देनेवाला भी नहीं है वर्ल्ड में।
  3. दोष हो उसमें हर्ज नहीं है, पर दोष दिखाई देना चाहिए।
  4. भूल को मिटाने के लिए भूल को भूल कहना पड़ता है। उसका पक्ष नहीं लेना चाहिए।
  5. हर एक अड़चन जो आती है न, पहले सहन करने की ताकत आती है, बाद में अड़चनें आती हैं। नहीं तो मनुष्य वहीं का वहीं खतम हो जाए। मतलब कानून ऐसे हैं सब।
  6. वास्तव में, एक्ज़ेक्टली क्या है यह जगत् कि इस जगत् में कोई दोषित है ही नहीं। आपको दोष दिखता है, वह आपकी देखने की दृष्टि में अंतर है। 
  7. कोई मनुष्य किसीका कुछ कर सकता ही नहीं है, ऐसा यह स्वतंत्र जगत् है।
  8. किसीका दोष दिखाई दे तब तक दुःख रहता है। दूसरों के दोष दिखने बंद हुए यानी छुटकारा।
  9. निजदोष देखने की दृष्टि उत्पन्न हो गई यानी परमात्मा होनी की तैयारी हुई।
  10. भूल बिना का ज्ञान और भूल बिना की समझ होगी तो तू खुद ही मोक्ष स्वरूप है।

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