दृष्टि बदलने से सुख मिला
"हमारे जीवन में, समस्याएँ तो वही की वही हैं। लेकिन सिर्फ़ दृष्टि बदलने से, दुःख, चिंता, क्लेश से मुक्ति मिल गई है। इस दृष्टि से मन को सुख मिला है। दृष्टि बदलने से दुःख दुःख जैसा नहीं रहा।"


जीवमात्र निरंतर सुख की ख़ोज में है, किसी को भी दुख पसंद नहीं है| लेकिन यह खोज तब समाप्त होती हैं, जब शाश्वत सुख का स्रोत प्राप्त हो जाता है| अपने सच्चे स्वरूप द्वारा ही शाश्वत सुख की प्राप्ति हो सकती है| ए. एम्. पटेल, जिन्हे दादा भगवान के नाम से भी जानते हैं। उन्हें शाश्वत सुख का मार्ग मिल गया था। उन्होंने इस संसार को एक एक बेजोड़ आध्यात्मिक विज्ञान दिया है, जो अक्रम विज्ञान के नाम से जाना जाता है।
अक्रम विज्ञान आत्मसाक्षात्कार पर आधारित है। इस अनोखे विज्ञान से हमें जीवन की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान मिलता है, जिससे जीवन सुखमय हो जाता है।
ज्ञानीपुरुष की कृपा से सिर्फ दो घंटों की विधि (ज्ञानविधि) द्वारा आत्मज्ञान प्राप्त हो सकता है। अनेकों ने इस शाश्वत सुख का अनुभव किया है! आप भी इस सुख को प्राप्त कर सकते हैं!
आइए और प्राप्त कीजिए आत्मज्ञान का यह अनूठा अनुभव, आत्मज्ञानी पूज्य दीपकभाई देसाई द्वारा।"मैंने ‘भुगते उसी की भूल’ किताब पढ़ी, उसे समझी। पढ़ी वह तो थियरी थी, लेकिन मुझे प्रैक्टिकल अनुभव करना था। सचमुच ऐसा हुआ कि छोटी सी गलती के कारण भरी सड़क पे मुझे दो थप्पड़ पड़े, गालियाँ भी! मुझे उसी क्षण दादाश्री का यह ज्ञान हाज़िर रहा कि भुगते उसी की भूल! मुझे कुछ भुगतना नहीं हुआ, अंदर आनंद रहा।"

"हमारे जीवन में, समस्याएँ तो वही की वही हैं। लेकिन..."
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"मैंने ‘भुगते उसी की भूल’ किताब पढ़ी, उसे समझी। पढ़ी..."
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"मुझे काम की वजह से और निजी जीवन में काफी टेंशन..."
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"यह मेरा अनुभव है की यह ज्ञान सारे शास्त्रों का..."
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"मेरे पिताजी के साथ मेरी अनबन रहती थी, मुझे सत्संग..."
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"मेरा जीवन बहुत ही दुःख और चिंता से भरा हुआ था। जब..."
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"ज्ञान से घर की सारी समस्याएँ हल होती जा रही हैं।..."
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"आत्मज्ञान प्राप्त करने के बाद मेरे शरीर में से..."
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"ज्ञान लेने से पहले जिंदगी बड़ी अस्त-व्यस्त थी..."
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"एक दिन पूज्य दीपकभाई का अनुभव सुना| यह दिल को छू..."
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“मृत्यु”, एक ऐसा शब्द है, जिसे याद करते ही शोक,भय और दुःख का अनुभव होता है। हर व्यक्ति को अपने जीवन में किसी ना किसी की मृत्यु का साक्षी तो बनना होता ही है। मृत शरीर देखते ही मन में मृत्यु के बारे में अनगिनत विचार आने लगते हैं। उसमें अगर अपने किसी करीबी व्यक्ति की अकाल मृत्यु हो जाए तो परिवार के सदस्य पूरी तरह से दुःख में डूब जाते हैं। ऐसे वक़्त में मृत्यु के स्वरूप की वास्तविकता और उसके रहस्य का...
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हिस्सा लीजिए पूज्य दीपकभाई के प्रश्नोत्तरी सत्संग में और पाइए अपने जीवन की रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान। ज्ञानविधि द्वारा अनुभव कीजिए आत्मा के आनंद का।
| 19 फरवरी | to | 19 फरवरी |
जब पूज्य दीपकभाई सीमंधर सिटी में मौजूद हों, तब आप आसानी से दादा दरबार में उन से मिल सकते हैं और बात भी कर सकते हैं।
यहाँ सत्संग, प्रवचन और उपदेश के रूप में नहीं बल्कि, पूज्य दीपकभाई के द्वारा संवादात्मक प्रश्नोत्तरी सत्संग में होता हैं| इस सत्संग में आपका स्वागत हैं, आप आध्यात्मिकता से जुड़े कोई भी प्रश्न पूछे, जैसे हमारी सच्ची पहचान क्या हैं, यह जगत कौन चलाता हैं, भगवान कहाँ हैं, कर्म क्या हैं, इत्यादि| लोगों को व्यवहारिक समस्याओं के समाधान भी प्राप्त हुए हैं, जैसे ‘क्रोध और चिंता से कैसे छुटकारा पाए’, ‘टकराव मुक्त जीवन के लिए, परिवार और मित्रों के साथ कैसे एडजेस्ट करे’ और बहुत कुछ| यहाँ आपको मिलेंगा, जीवन की मौलिक वास्तविकताए जानने का अवसर|
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