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कैसे बात करें कि बच्चे आपकी बात सुने?

बहुत सारे माता-पिता को यह शिकायत रहती है कि उनके बच्चे उनकी बात नहीं सुनते हैं। जब आप फोन पर बात कर रहे हों और सामने वाला व्यक्ति आप की बात नहीं सुन पा रहा तब आप क्या करते हैं? क्या आप अपनी ओर से ऐसा प्रयास नहीं करते जिससे वह आपकी बात सुने? बच्चों से बात करते समय भी यही करना है। आपको यह जानने की ज़रूरत है कि बच्चों से कैसे बात करें जिससे वे आपकी बात सुने।

रोज़ की बातचीत में स्कूल जाने से लेकर स्कूल से आने के बाद होमवर्क की बातें, महत्वपूर्ण होती हैं। हम नहीं चाहते कि इन बातों से कलह हो। इसलिए हमें मुख्य यह बटन दबाए रखना चाहिए कि हमारे शब्दों से उन्हें दुख न हो। दिन की शुरुआत प्यार भरे शब्दों से करें। बच्चे हम पर आश्रित होते हैं। उन्हें हमारे प्रेम और हूँफ की ज़रूरत है।

आदेशात्मक शब्दों से बच्चे परेशान होते हैं जैसे कि- ऐसा करो और वैसा करो या ऐसा मत करो। जऱा सोचिए-कि जब आपको आपके बॉस या जीवन साथी के साथ काम करना पड़े जो हर वक्त आपके पीछे पड़ा रहे कि ‘काम पूरा करो, जल्दी करो, तुम हमेशा देर से आते हो!, तुम्हारे काम का कोई ठिकाना नहीं होता...’ तब आपको कैसा अपमानित महसूस होगा! आपका बच्चा छोटा है, लेकिन उसकी अपनी स्वतंत्र इच्छा शक्ति है और उसे उसकी पसंद के अनुसार काम करने की स्वतंत्रता है।

यह ध्यान रखिए : जब आपके बॉस, मित्र या परिवार आपकी प्रशंसा करते हैं तब आपको कितनी खुशी होती है। इसी तरह रोज़ आप अपने बच्चों की उन छोटी-छोटी बातों में प्रशंसा करें जिसमें आप उन्हें प्रोत्साहित करना चाहते हैं।

दैनिक परिस्थिति का विश्लेषण करें और उसमें से समाधान लें।

  • जब बच्चा घर आए तो उसके साथ बातें करें : ‘लगता है तुम बहुत थक गए हो, थोड़ा खा-पी लो।‘ उसे होमवर्क और दूसरी चीजे़ करने को कहने के बदले, उसे जो पसंद हो उन चीजों के बारे में बात करें, जैसे कि उसके मित्र, गेम्स आदि। यह बच्चों के साथ मित्रता करने की टिप है, जो, बच्चें सुने उस तरिके से बात करने में उपयोगी होगी। उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताएँ जिसमें उनकी पसंद के विषय पर बातें करने के लिए प्रोत्साहित करें। सबसे अच्छी चीज़ जो आप अपने बच्चे को दे सकते हो वह है उनके साथ समय बिताना। अपने बच्चों के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकर आप आश्चर्य चकित हो जाएँगे और उनके रुप में आप नया मित्र पाएँगे।
  • पढ़ाई के लिए एक निश्चित समय निर्धारित करें और उन्हें प्यार से बताएँ। एक ही बात को बार-बार याद ना दिलाएं- यह दर्शाता है कि आपको उन पर विश्वास नहीं है। होमवर्क ना करने का जो परिणाम आता है वह उन्हें भुगतने दें। खुद अनुभव करके सीखने से जो समझ मिलती है वह और किसी में से नहीं मिलती।
  • गुस्सा करने के बजाय शांति से बात करें : जैसे कि, ‘तुम ब्रश और स्नान कर लो उसके बाद हम नाश्ता करेंगे। या तुम कुछ समय मोबाइल भी देख सकते हो।’
  • आप उन्हें जो कहना चाहते हैं उसके लिए अलग-अलग तरीके अपनाए : जैसे कि-जल्दी से अपनी पढ़ाई पूरी कर लो जिससे शाम को तुम अपने मित्रों के साथ खेल सको या टी.वी देख सको।
  • आप अपने बच्चे से कपड़े उठाने के लिए कहें पर नोर्मल टोन में, बिना किसी दबाव या डायलॉग बाजी के जैसे कि,‘एक ही बात आपको कितनी बार बतानी पड़ेगी!’ या ‘तुम कभी भी मेरी बात नहीं सुनते हो!’ ऐसा कई दिनों तक आपको उसके कपड़े रखने के बाद कभी किसी दिन एक बार प्यार से बोलना चाहिए।
  • सकारात्मक (पॉज़िटिव) शब्द सामने वाले को प्रोत्साहित करते हैं। उनमें सुख के स्पंदन होते हैं। इसलिए बच्चों की अच्छी बातों को प्रोत्साहित करें और बुरी बातों पर ध्यान न दें। दूसरे शब्दों में, आप जो काम उनके पास कराना चाहते हैं उसकी प्रशंसा करें। बच्चों के साथ बात करने का यह सबसे आसान तरिका है जिससे वे आपकी बात सुने। साथ में दिए गए उदाहरण ध्यान में रखिए, ‘जब तुम अपना होमवर्क जल्दी पूरा कर लेते हो तब तुम बहुत खुश होते हो क्योंकि तुम्हें मित्रों के साथ खेलने का ज्यादा टाइम मिलता है।’ या ‘जब तुम बाहर ताजी हवा में खेलते हो तब तुम ज्यादा खुश और फुर्तीले लगते हो।’ या ‘रात को साथ में खाना खाने से कितनी खुशी महसूस होती है। हम आपस में जुड़े रहते हैं।’ या ‘जब तुम सुबह जल्दी तैयार हो जाते हो, तब तुम्हें अपनी पसंद का काम करने के लिए अधिक समय मिलता है।’
  • सब दिन एक जैसे नहीं होते, कई बार बुरे दिन भी होते हैं परंतु उसका असर आपके निश्चय पर नहीं होना चाहिए- यह निश्चय की छोटे बच्चे को किंचित मात्र दुःख नहीं देना हैं।
  • हमेशा सकारात्मक शब्द बोलना चाहिए क्योंकि छोटे बच्चे से लेकर सबके भीतर शुद्धात्मा है। जब कुछ अच्छा होता है, तो उसके बारे में बुरा बोलना गलत है। यह सब समस्या इसलिए होती है क्योंकि लोग अच्छी बात में भी बुराई खोजने का प्रयत्न करते हैं। इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए कि हमें उस तरीके से बात करना सीखना होगा जिससे बच्चे हमारी बात सुने। और जब आप कहते हैं “कुछ भी बुरा नहीं हुआ है,” तब से ही भीतर जबरजस्त परिवर्तन आने लगता है। इसलिए हमेशा अच्छा ही बोलें।
  • जिस विषय में आप बच्चों को सुधारना चाहते हैं उस विषय पर उन्हें रसप्रद कहानियाँ सुनाएँ।

परम पूज्य दादाश्री कहते हैं कि, “वर्षों के वर्षों बीत गए, पर थोड़ा भी नेगेटिव नहीं हुआ है मेरा मन। थोड़ा भी, किसी भी संजोग में नेगेटिव नहीं हुआ है। ये मन यदि पोज़िटिव हो जाएँ लोगों के, तो भगवान ही बन जाएँ। इसलिए लोगों से क्या कहता हूँ कि यह नेगेटिविटी छोड़ते जाओ, समभाव से निकाल करके। पोज़िटिव तो अपने आप रहेगा फिर। व्यवहार में पोज़िटिव और निश्चय में पोज़िटिव नहीं और नेगेटिव भी नहीं!

बच्चो की आग्र्युमेन्ट वास्तव में आपका ही रिएक्शन है

प्रश्नकर्ता : यहाँ के बच्चे बहस बहुत करते हैं, आग्र्युमेन्ट बहुत करते हैं। यह आप क्या लेक्चर दे रहो हो, कहते हैं?

दादाश्री : बहस बहुत करते हैं, फिर भी प्रेम से सिखाओगे न तो बहस कम होती जाएगी। यह बहस आपका रिएक्शन है। आप अभी तक उन्हें दबाते रहे हैं न। वह उसके दिमाग़ में से जाता नहीं है, मिटता ही नहीं। इसलिए फिर वह बहस करता है। मेरे साथ एक भी बच्चा बहस नहीं करता। क्योंकि मैं सच्चे प्रेम से यह आप सबके साथ बातें कर रहा हूँ।

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