
वीतरागों ने किस आधार पर जगत् को निर्दोष देखा? क्योंकि सभी लोग कर्मों के अधीन हैं।
— परम पूज्य दादा भगवानजब तक जगत् दोषित दिखाई देगा तब तक भटकते रहना पड़ेगा और जब जगत् निर्दोष दिखाई देगा तब अपना छुटकारा होगा।
— परम पूज्य दादा भगवानअंतिम प्रकार की जागृति कौन सी है कि इस जगत् में कोई दोषित ही न दिखाई दे!
— परम पूज्य दादा भगवानजिसे खुद के दोष देखने हैं, सामने वाले के दोष नहीं देखने हैं, उस पर इस जगत् में कोई ऊँगली नहीं उठा सकता।
— परम पूज्य दादा भगवानखुद के गुनाह दिखाई दें, वह ‘सम्यक् दृष्टि’ है व औरों के गुनाह दिखाई दें, वह ‘मिथ्या दृष्टि’ है।
— परम पूज्य दादा भगवानभगवान कौन हैं? जो शरीर होने के बावजूद भी शरीर के मालिक नहीं हैं, मन के मालिक नहीं हैं, वाणी के मालिक नहीं हैं, किसी भी चीज़ के मालिक नहीं हैं, वे इस जगत् में भगवान हैं!
— परम पूज्य दादा भगवानsubscribe your email for our latest news and events
