आत्मसाक्षात्कार - शाश्वत सुख प्राप्त करने का प्रवेश द्वार

हमारा वास्तविक स्वरुप अनंत सुख का धाम है, फिर भी हम विनाशी चीजों में सुख खोजते हैं! जब तक हम यह नहीं पहचानते कि हमारा वास्ताविक स्वरूप क्या है, तब तक सभी कुछ क्षणिक और विनाशी ही है। आत्मसाक्षात्कार होने के बाद ही शाश्वत सुख का अनुभव किया जा सकता है।

यह जानना कि ‘मैं कौन हूँ’, वही आत्मसाक्षात्कार है।

क्या आप जानते हैं कि वास्तव में आप कौन है? वास्तव में आप चंदूलाल हैं या आपका नाम चंदूलाल है?

आपका नाम ही आपकी पहचान है! लेकिन क्या आपके दोस्त स्कूल में आपको “चंदूलाल” या “चंदू” कहकर नहीं बुलाते थे? आपके माता-पिता आपको प्यार से कुछ और ही कह कर बुलाते हैं और पत्नी भी। अगर चाहें तो, नाम तो कोर्ट में जाकर बदला भी जा सकता है। क्या नाम बदलने से आप बदल जाते हैं? क्या नाम बदलने से आप अपना अस्तित्व खो देते हैं? बिलकुल नहीं!

तो वास्तव में आप कौन हैं?

चलिए इसे दूसरी तरह से देखते हैं। आप कहते है, “’मेरा सिर”, “मेरा शरीर”, “मेरे पैर”, “मेरी आँखें”, “मेरे कान”। आप ऐसा नहीं कहते कि “मैं सिर हूँ”, “मैं शरीर हूँ”, आदि। इसका मतलब यह है कि आपके पूरे शरीर का समावेश ‘मेरा’ में होता है। उसी प्रकार आप कहते हैं, “’मेरी घड़ी”, “मेरा चश्मा”, “मेरा घर”, “मेरी कार”, आप ऐसा नहीं कहते, “मैं घड़ी हूँ”, “मैं चश्मा हूँ”, आदि। अर्थात् ऐसा है कि आपकी सब चीज़ें ‘मेरेपन’ के अंतर्गत ही आती है। इन सब चीज़ों का मालिक कौन है जो ‘मेरापन’ के अंतर्गत आती हैं? जो कुछ भी ‘मेरापन’ के अंतर्गत आता है, उन सभी चीज़ों को एक ओर रख दें तो बचेगा सिर्फ मालिक, ‘मैं’| इस ‘मैं’ को जानने की जरूरत है; यही आत्मसाक्षात्कार कहलाता है।

 

“यदि खुद के स्वरूप को पहचान लिया तो फिर वह, खुद ही परमात्मा है |”

- दादा भगवान

ज्ञानीपुरुष द्वारा, ‘मैं’ (आत्मा) का साक्षात्कार|

जैसे सोने को अन्य धातु से अलग करने के लिए सुनार की आवश्यकता है, वैसे ही आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के लिए ज्ञानीपुरुष की आवश्यकता है। ज्ञानीपुरुष की कृपा से आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करना संभव है, एक वैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा, जिसे ज्ञानविधि कहा जाता है।

ज्ञानविधि – आत्मसाक्षात्कार प्राप्ति की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया।

अक्रम विज्ञान के अनोखे मार्ग में ज्ञानविधि दो घंटे की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें ज्ञानीपुरुष 48 मिनट तक भेद ज्ञान के वाक्य बुलवाते हैं और ज्ञान लेनेवालों को उन सभी वाक्यों को दोहराना होता हैं। इसे ‘भेद विज्ञान’ कहते है। इस प्रक्रिया में आत्मा और अनात्मा के बीच भेद रेखा पड़ जाती है। उसके बाद जीवन के रोज़मर्रा के उदहारण दे कर पाँच आज्ञाएँ (पाँच प्रमुख सिद्धांत) समझाई जाती हैं। ये “पाँच आज्ञाएँ” आत्मानुभव की रक्षा करती हैं और आपको समभाव और शांतिपूर्वक जीवन जीने में मदद करती हैं|

ज्ञानविधिके लिए प्रत्यक्ष आना पड़ता है। क्या प्रज्वलित मोमबत्ती के चित्र का उपयोग करके  मोमबत्ती को प्रज्वलित किया जा सकता है? नहीं! आपको एक प्रज्वलित मोमबत्ती का उपयोग करना पड़ेगा। उसी तरह, स्वयं के स्वरूप को पहचानने के लिए प्रत्यक्ष ज्ञानीपुरुष की जरूरत पड़ती है।

ज्ञानविधि एक प्रयोगात्मक प्रक्रिया है जिसमें अठारह (18) साल या उससे अधिक उम्र के लोग हिस्सा ले सकते हैं। यह प्रक्रिया एक अमूल्य उपहार है। जो सभी को निःशुल्क दिया जाता है। यहाँ पर आपके वर्तमान धर्म या गुरु को बदलने की ज़रूरत नहीं है। ज्ञानीपुरुष की शिक्षाएँ सभी धर्म, लिंग और किसी भी सामाजिक स्तरवालों के लिए उपयोगी हैं।

इस अमूल्य अनुभव को प्राप्त करने के लिए सिर्फ विनय और सरलता की ही आवश्यकता है।

ज्ञानविधि की माहिती

ज्ञान विधि क्या है? वह आत्मानुभूति की २ घंटे की प्रक्रिया हैं| वर्त्तमान में हमे जो ज्ञान है की मैं डॉक्टर हूँ/ पति हूँ/ बेटा हूँ, वह सब संसारिक ज्ञान है| ज्ञान विधि द्वारा हमे अब्सोलुट (पूर्ण) ज्ञान प्राप्त होता है|ज्ञान विधि के पश्चात हमारी सच्ची समझ हमे आनंदमय जीवन की ओर ले जाएगी|

ज्ञानविधि के बाद

“आत्मसाक्षात्कार प्राप्ति के लक्षण क्या हैं? जागृति की उपस्थिति, निरंतर जागृति |”

~दादा भगवान
  • ज्ञानविधि के बाद दृढ़ विश्वास हो जाता है कि, ‘मैं शुद्धात्मा हूँ’ और यहीं से जागृति कि शुरुआत होती है।
  • यह समझ में आ जाता है कि रियल (सही) कर्ता ‘कौन हैं?’ इस से चिंताएं मिट जाती हैं। इस प्रकार आपको प्रतिकूल परिस्थितियों में भी स्थिरता रह पाती हैं।
  • आंतरिक कमजोरियाँ जैसे कि क्रोध, मान, माया, लोभ धीरे-धीरे कम होते जाते हैं और आत्मा का आनंद बढ़ता जाता है।
  • अक्रम विज्ञान के वैज्ञानिक सिद्धांतों का उपयोग करने से शाश्वत शांति, सुख और जीवमात्र के प्रति सदभाव के अनुभव कि शुरुआत होती है।
  • आत्मसाक्षात्कार से सभी जीवों के प्रति प्रेम उत्पन्न होता है और परिणाम स्वरूप जगत् कल्याण की भावना उत्पन्न होती है।
  • सभी के साथ ऐक्यता का अनुभव होता है, क्योंकि वास्तव में आत्मा सभी में एक जैसा ही है।

ज्ञानविधि के अनुभव

लाखों लोगों ने अक्रम विज्ञान द्वारा आत्मज्ञान का अनुभव किया है। और आत्मा की जागृति में रहकर अपने सांसारिक फर्ज़ निभा रहे हैं।

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