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चिंता करना कैसे बंद करें: चिंता और तनाव से मुक्त बनें

चिंता क्यों? क्या आपको चिंता करने में मज़ा आता है?

"नहीं, मैं चिंता करना बंद करना चाहता हूं ..."

तो फिर चिंता को रोकने के लिए इन युक्तियों का प्रयास करें:

  • विश्लेषण करें कि क्या आपकी चिंताएं स्वयं आमंत्रित हैं या एक वास्तविकता है? उदाहरण के लिए, जब आप इस बारे में चिंता करते हैं कि लोग क्या सोचेंगे और आप उनकी अपेक्षाओं के अनुकूल होने की कोशिश करेंगे, तो यह एक स्व-आमंत्रित चिंता है।
  • समस्या के बारे में विचारों में न उलझें, इसके बजाय समाधान खोजने पर ध्यान केंद्रित करें।
  • यदि आप कोई समाधान नहीं ढूंढ पा रहे हैं, तो अपने शुभचिंतक से सलाह लें।
  • काम पर ध्यानकेंद्रित ​करे, अन्यथा यह न केवल आपके वर्तमान, बल्कि आपके भविष्य को भी बर्बाद कर देगा।
  • अगर चीजें आपके नियंत्रण से बाहर हैं और आप एक समाधान के बारे में नहीं सोच सकते हैं, तो चिंता क्यों करें? सकारात्मक बने रहें और प्रयास करते रहें।

​​​​​​भगवान ने कहा है, "प्रतिकूल परिस्थितियों का विरोध करो, समाधान खोजो, लेकिन चिंता मत करो।"

चिंता एक आग है। व्यक्ति चिंता से ग्रस्त हो जाता है कि कुछ बुरा हो सकता है। परम पूज्य दादाश्री कहते हैं, " सावधानी तो जागृति है और चिंता यानी जी जलाते रहना।" जैसा कि जीवन में सभी तनाव और चिंताओं का मुख्य कारण ‘कर्तापन’ और अपना अंहकार है, चिंता मुक्त होने का अंतिम समाधान यह समझना होगा कि वास्तविक इस दुनिया में ‘कर्ता’ कौन है। इस ज्ञान को प्राप्त करने के लिए पहला कदम आत्मज्ञान को प्राप्त करना और कर्तापन के पीछे विज्ञान की खोज करें।

जानें कि चिंता को कैसे रोकें और खुद को चिंताओं की जंजीरों से मुक्त करने के लिए पढ़े...

क्या आप बहुत चिंता करते हैं?

क्या आप बहुत चिंता करते हैं? क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी चिंताएँ आपने ख़ुद खड़ी की हैं या हकीकत है? चिंता करने से समाधान तो नहीं आएगा लेकिन स्थिति और खराब होगी। तो चिंता क्यों करें?

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Spiritual Quotes

  1. चिंता तो एक प्रकार का अहंकार कहलाता है।
  2. जब चिंता होने लगे, तब समझना कि काम बिगड़नेवाला है और जब चिंता नहीं हो तो समझना काम अच्छा होगा।
  3. चिंता बंद हो, तभी से वीतराग भगवान का मोक्ष मार्ग कहलाता है।
  4. प्राप्त को भुगतो, अप्राप्त की चिंता मत करो।' अर्थात क्या कि, 'जो प्राप्त है उसे भुगतो!
  5. विचार करने में हर्ज नहीं है। विचार करने का अधिकार है, कि भाई यहाँ तक विचार करना, और विचार जब चिंता में परिणित हो तो बंद कर देना चाहिए।
  6. आत्मज्ञान बगैर चिंता जाती नहीं है।
  7. अब सावधानी और चिंता में बहुत फर्क। सावधानी यह जागृति है और चिंता यानी जी जलाते रहना।
  8. जिसका उपाय नहीं, उसकी चिंता क्या? कोई भी बुद्धिमान समझेगा कि अब कोई उपाय नहीं रहा, इसलिए उसकी चिंता छोड़ देनी चाहिए।
  9. एक ही डिपार्टमेन्ट की उपाधि हो, उसे दूसरे डिपार्टमेन्ट में मत ले जाना। एक डिवीजन मेें जायें तो वहाँ जो हो वह सब कामपूर्णतया कर लेना।
  10. चिंता सब से बड़ा अभिमान है इसलिए कुदरत उसे बहुत बड़ा दंड देती है। भगवान को गालियाँ देनेवाले की करनेवाले को ज़्यादा दंड मिलता है। जो काम दूसरा करता है उसकी चिंता तू कर रहा है? क्या तू इस कुदरत से भी बड़ा है?
  11. जो चिंता करता है, वह भगवान को नहीं मानता और जो भगवान को मानता है, वह चिंता नहीं करता।
  12. एक बार कढ़ापा-अजंपा करे तो भगवान कहते हैं कि इसे तो मेरी पड़ी ही नहीं है, खुद के सिर पर चिंता ले लेता है, तो करने दो इसे आराम से चिंता!
  13. चिंता समझ का नाश करने वाली चीज़ है।
  14. चिंता होने लगे तो समझना कि कार्य बिगड़ने वाला है और चिंता नहीं हो तो समझना कि नहीं बिगड़ेगा। चिंता कार्य के लिए अवरोधक है!
  15. चिंता ही संसार का सब से बड़ा बीज है। क्योंकि चिंता सब से बड़ा अहंकार है। अहंकार चला गया तो चिंता गई।
  16. घर में यदि एक व्यक्ति चिंता के विचारों में हो तो बाकी सब पर भी आमने-सामने असर होता रहता है, और यदि चिंता मुक्त हो गया तो?!
  17. चिंता हो, ऐसी जगह पर निश्चिंत रह सके, उसे कहते हैं ‘विज्ञान’! लोग तो ‘ईज़ी चेयर’ पर बैठकर भी ‘अन्ईज़ी’ दिखाई देते हैं!
  18. जिसका उपाय नहीं है, उसकी चिंता कैसी? मृत्यु का उपाय नहीं है। तभी तो, कोई उसकी चिंता करता है क्या?
  19. जहाँ धर्म है वहाँ चिंता नहीं है और जहाँ चिंता है वहाँ धर्म नहीं है।
  20. इस जगत् में दो तरह के लोगों की चिंता मिटती है। एक, ज्ञानी पुरुष और दूसरा, परोपकारी की।

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