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जीवन में शांति प्राप्त करने के लिए हर परिस्थिति में एडजस्ट कैसे करें?

जीवन में शांति पाने के लिए लोग अनेक उपाय अपनाते हैं, जैसे कि:

और यह लिस्ट इसी प्रकार जारी रहती है…

क्या हो, यदि जीवन में हमेशा के लिए शांति पाने का केवल एक ही सरल उपाय हो? वह है - ‘एडजस्ट एवरीव्हेयर होना सीखना’।

यह जीवन एडजस्टमेंट के अलावा और कुछ नहीं है। हमें हर परिस्थिति में एडजस्ट करना सीखना चाहिए। यदि हम कहीं भी एडजस्ट नहीं करेंगे, तो लोग हमें एडजस्ट होने के लिए मजबूर कर देंगे। फिर क्यों न हम अपनी मर्जी से ही एडजस्ट हो जाएँ? उदाहरण के लिए, अचानक बारिश होने पर, हम अपने छाते का उपयोग तो करते ही हैं। ऐसी परिस्थिति में हम कभी कोई सवाल, बहस या विरोध नहीं करते; है न? जानते हैं क्यों? क्योंकि हम जानते हैं कि ऐसा करने का कोई फ़ायदा नहीं है।

एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत है, "परिवर्तन ही संसार का नियम है।" फिर भी, हम इस बदलाव को स्वीकार करने में अक्सर असफल रहते हैं और बहाव के विपरीत तैरने का प्रयास करते रहते हैं, जिससे हम अपनी सीमित शक्ति व्यर्थ ही खर्च कर देते हैं।

हर परिस्थिति में एडजस्ट करने की यह सरल, लेकिन अत्यंत प्रभावशाली तकनीक आपके और आपके आसपास के लोगों के जीवन में भी शांति ला सकती है। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आगे पढ़ें…

Adjustments in Life

If you don't adjust in your life, adjust with people willingly then people will make you adjust forcingly. You have to take maximum adjustment with your spouse as you are with her for 24 hours.

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Spiritual Quotes

  1. संसार में और कुछ नहीं आये तो हर्ज नहीं पर एडजस्ट होना तो आना ही चाहिए।
  2. सामनेवाला 'डिसएडजस्ट' (प्रतिकूल) होता रहे पर आप एडजस्ट होते रहें तो संसार सागर तैरकर पार उतर जाओगे। जिसे दूसरों को अनुकूल होना आया, उसे कोई दुःख ही नहीं रहेगा। 'एडजस्ट एवरीव्हेयर'!
  3. हर एक के साथ ‘एडजस्टमेन्ट’ हो जाए, वही सब से बड़ा धर्म है।
  4. जमाने के अनुसार एडजस्टमेन्ट लेना होगा।
  5. जिसे 'एडजस्ट' होने की कला आ गई, वह दुनिया से 'मोक्ष' की ओर मुड़ गया।
  6. जितने एडजस्टमेन्ट लोगे, उतनी शक्तियाँ बढ़ेंगी और अशक्तियों का क्षय होगा।
  7. भूल सुधारेंगे तो 'एडजस्ट' होगा।
  8. व्यवहार में रहा उसे कहते हैं कि जो ‘एडजस्ट एवरीव्हेअर’ हो जाए!
  9. इस काल में तो प्रकृतियाँ अलग-अलग होती है, तो ‘एडजस्ट’ हुए बिना कैसे चलेगा?
  10. बुद्धि तो किसे कहेंगे कि जो क्रोध-मान-माया-लोभ का विवरण करे और उन सब को बाजू पर रख दे और घर में टकराव नहीं होने दे। ‘एवरीव्हेर एडजस्टमेन्ट’ करवाए।
  11. जिसे दूसरों के साथ अनुकूल होना आता है, उसे कोई दु:ख ही नहीं रहता। ‘एडजस्ट एवरीव्हेर।’
  12. अपनी बात सामने वाले को ‘एडजस्ट’ हो ही जानी चाहिए। अपनी बात सामने वाले को ‘एडजस्ट’ नहीं हो, तो वह अपनी ही भूल है। हर तरह से भूल नहीं है लेकिन अपनी कुछ न कुछ भूल तो है। भूल खत्म हो जाए तो ‘एडजस्ट’ हो पाएँगे। वीतरागों की बात ‘एवरीव्हेर एडजस्टमेन्ट’ की है।
  13. ‘एडजस्ट एवरीव्हेर’, यह वाक्य आपके संसार को ‘टॉप’ पर ले जाएगा। व्यवहार को भी ‘टॉप’ पर ले जाए बिना कोई मोक्ष में नहीं गया है। व्यवहार आपको छोड़े नहीं, उलझाता रहे तो आप क्या करोगे? इसलिए व्यवहार को फटाफट सुलझा दो।
  14. यदि मोक्ष में जाना हो तो ‘एवरीव्हेर एडजस्ट’ होना ही पड़ेगा।
  15. ‘एवरीव्हेर एडजस्ट’, हो जाए तब वीतरागों की बात को पूर्णत: पा लिया, ऐसा कहा जाएगा।
  16. मन की शांति, वह मनोवैभव है। मनोवैभव, वह ‘टेम्परेरी एडजस्टमेन्ट’ है। आत्मशांति, वह आत्मवैभव है और आत्मवैभव ‘परमानेन्ट एडजस्टमेन्ट’ है।

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