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शिव कौन?भगवान शिव किसे कहते हैं?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिव भगवान हिमालय पर रहते थे, उनकी पत्नी पार्वती और पुत्र कार्तिकेय और गणेश थे। ये सब उनके बाह्य स्वरूप के लक्षण है, किन्तु वास्तव में जो भी व्यक्ति आत्मज्ञान पा लेता है, वो भीतर में "शिव" है।

शिव" को नीलकंठ क्यों कहते हैं?

"नीलकंठ" का मतलब होता है, इस संसार में ज़हर पीकर (खुद को जो अपमान और निंदा मिलती है उसका समता से स्वीकार करके) बदले में आशीर्वाद देनेवाला।

Lord Shiva

"Pujya Deepakbhai offers a Gnani's understanding of the deeper spiritual meaning of "Shiva"."

ॐ नम: शिवाय" से "शिवोहम" तक

अज्ञानतावाली जीवदशा में, "जीव" खुद को शिव से अलग मानता है और कहता है, "ॐ नम: शिवाय" (मैं शिव को नमस्कार करता हूँ)। जब उसे आत्मज्ञान होता है और उसे निरंतर आत्मा की जागृति रहती है, जो इस स्थूल शरीर से अलग है, तब उसे "शिवोहम" (मैं शिव हूँ) की अनुभूति होती है। उसके बाद "जीव" और "शिव" में अंतर (भेद) नहीं रहता।

परम पूज्य दादाश्री को ई.स. १९५८ के जून महीने में आत्मज्ञान हुआ और उन्हें केवळज्ञान स्वरुप अनुभव में आया। दादाश्री मुमुक्षुओं को यही आत्मज्ञान २ घंटे में देते थे। पूज्य नीरू माँ को और पूज्य दीपकभाई को ये आत्मज्ञान (अक्रम मार्ग से) परम पूज्य दादाश्री से मिला था।

आप भी पूज्य दीपकभाई द्वारा की जानेवाली "ज्ञानविधि" में आकर आत्मज्ञान का अनुभव पा सकते हैं। उसके बाद पाँच आज्ञाओं का पालन करके आत्यंतिक मोक्ष पा सकते हैं।

मंदिर की बायीं ओर शिवलिंग है, जो आत्मा का प्रतिक है। शिवलिंग के पास में ही पार्वती माता, गणपति जी और हनुमान जी विराजमान हैं, जिसे आप नीचे दर्शाए गए पैनरैम द्वारा देख सकते हैं।

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