टीनेजर्स की परवरिश : मात-पिता और बच्चों का रिश्ता

माता-पिता और बच्चों का संबंध अनादि काल से है। माता-पिता और बच्चों के संबंध को आदर्श बनाने के प्रयत्न आपको हर कहीं देखने को मिलते हैं।

किशोर बच्चों को सँभालना माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है, यह एक ऐसी कला है जिसमें उन्हें ट्रेनिंग नहीं मिली। आज के युवा वर्ग की मानसिकता की संपूर्ण और गहरी समझ के साथ पूज्य दादाश्री हमें बताते हैं कि इन बच्चों का दिल कैसे जीता जा सकता है।

परम पूज्य दादाश्री ने माता-पिता को समझने में बहुत मदद की है कि बच्चों का पालन-पोषण कैसे करें, उन्हें नैतिक मूल्य, अनुशासन और शिष्टाचार आदि संस्कार कैसे दें।

पूज्य दादाश्री ने बच्चों और युवाओं को भी समझाया है कि माता-पिता के साथ अच्छे और सौहार्दपूर्ण संबंध कैसे रखें और यह बताया है कि माता-पिता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है।

दादाश्री हमें एक आदर्श माता-पिता बनने की कला सिखाते हैं और यह कि कैसे शुद्ध प्रेम, समभाव और आध्यात्मिक पद्धति द्वारा हम कली को एक खूबसूरत फूल बना सकते हैं। एक आदर्श माता-पिता कैसे बनें यह समझने के लिए पढ़ें...

 

माता-पिता और बच्चों के संबंध

माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव होना यह आम बात है| इस विडियो में पूज्य नीरूमाँ, बच्चों को कैसे प्यार और स्नेह से सँभाले, उसकी चाबियाँ देते हैं|

Spiritual Quotes

  1. ये बच्चे अपना आईना हैं। अपने बच्चों पर से पता चलता है कि अपनी कितनी गलतियाँ हैं!
  2. बढे़-घटे, वह आसक्ति कहलाती है। जो बढे़-घटे नही वह परमात्म-प्रेम है।
  3. मारने से जगत् नहीं सुधरता। डाँटने से या चिढ़ने से भी कोई नहीं सुधरता। सही करके दिखाने से सुधरता है। जितना बोलें उतना पागलपन है।
  4. इस हिन्दुस्तान का एक बच्चा सारे विश्व का बोझ उठा सके, इतनी शक्ति का धनी है। सिर्फ उसे पुष्टि देने की ज़रूरत है। ये तो भक्षक निकले! भक्षक यानी अपने सुख के लिए जो दूसरों को सभी तरह से लूट लें। जो खुद के सुख का त्याग करके बैठा है, वही दूसरों को समस्त सुख दे सकता है।
  5. बच्चा अपने संस्कार लेकर ही आता है। उसमें तुम्हें मदद कर के उन संस्कारों को रंग देने की ज़रूरत है।
  6. बच्चों के लिए अच्छी भावना करते रहो। सभी अच्छे संयोग आ मिलेंगे। नहीं तो इन बच्चों में कोई सुधार होनेवाला नहीं है। बच्चे सुधरेंगे, लेकिन अपने आप कुदरत सुधारेगी।
  7. जिस दिन से बच्चों के साथ आपकी झिक-झिक बंद हो जाएगी, उस दिन से बच्चे सुधरने लगेंगे। आपके शब्द अच्छे निकलते नहीं, इसलिए सामनेवाला अकुलाता है। आपके शब्द स्वीकार नहीं होते और उल्टे वे शब्द पलटकर वापस आते हैं।
  8. जबकि माता-पिता उसे अपने जैसा बनाना चाहते हैं। अरे, उसे खिलने दो, उसकी शक्तियाँ क्या हैं? उसे खिलने दो। किसका स्वभाव कैसा है, वह देख लेना है।
  9. तुम ऐसा बोलो कि बच्चों को तुम्हारी बातों में इन्टरेस्ट (रुचि)आये, तब वे तुम्हारा कहा हुआ करेंगे ही।
  10. माता-पिता तो वे कहलाते हैं कि अगर बेटा बुरी लाईन पर चला गया हो, फिर भी एक दिन जब माता-पिता कहें, ‘बेटा, यह हमें शोभा नहीं देता, यह तूने क्या किया?’ तो दूसरे दिन सब बंद कर दे। ऐसा प्रेम है ही कहाँ? यह तो बगैर प्रेम के माता-पिता! यह जगत् प्रेम से ही वश होता है।

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