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कृष्ण भगवान कौन है?

आज भगवान कृष्ण की भक्ति दो स्वरुप में की जाती है, बाल कृष्ण और योगेश्वर कृष्ण। सिर्फ ज्ञानीपुरुष को ही (जिन्हें आत्मज्ञान हुआ हो) कृष्ण भगवान की सही पहचान होती है, क्योंकि उनकी आत्म-जागृति कृष्ण भगवान की जागृति के समान होती हैं। ऐसे ज्ञानी कभी-कभार होते हैं।

काफ़ी लोग सोचते हैं कि कृष्ण भगवान ने बहुत युद्ध किए, बहुत सारे लोगों को मार दिया, उनकी सोलह हज़ार रानियाँ थी, वे राजसी ऐश्वर्यवाला जीवन जी रहे थे, इत्यादि। ऐसी परिस्थिति में उन्हें कैसे "भगवान" माना जाए? पूरी दुनिया में लोग क्यों उनकी श्रद्धा से भक्ति करते हैं?

वास्तव में भगवान (मतलब आत्मा) कृष्ण रुप में थे। दूसरे शब्दों में वे आत्म ज्ञानी थे। वे हमेशा निज स्वरुप की जागृति में रहते थे (मैं शुद्धात्मा हूँ और ये देह अलग है)।

भौतिक रूप से संसार के हर कार्य में उपस्थित रहने के बावजूद कृष्ण भगवान हमेशा "मैं किसी भी कार्य का कर्ता नहीं हूँ"। उनकी हजारों रानियाँ थी और वे राजसी जीवन व्यतीत कर रहे थे फिर भी वे "नैष्ठिक ब्रह्मचारी" थे। उन्हें हमेशा ये लक्ष्य में रहता था कि वे कर्मों से भाग नहीं सकते और जागृति में रहकर कर्मफल को भुगतना ही सही तरीक़ा है।

Lord Krishna

"Lord Krishna is not an ordinary King. He was not the doer of anything. His vision showed that the war will not stop and He told Arjun that you will fight in the war. Lord Krishna was a Narayan Vasudev."

गीता का सार

महाभारत के युद्ध के मैदान में श्री कृष्ण भगवान ने अर्जुन को कहा, "तू लंबे अरसे से मुझे पहचानता है फिर भी तू मेरे सही स्वरुप को नहीं जानता। तू जो अपने (खुद के) सामने देखता है वह मेरा सही स्वरुप नहीं है; जो तुम्हे दिखता है वो मेरा स्थूल स्वरुप (भौतिक शरीर) है। मैं इस शरीर से भिन्न हूँ। मैं शुद्ध आत्मा हूँ। तू भी शुद्ध आत्मा है। तेरे भाई, चाचा, गुरु और मित्र जिनसे तू यह युद्ध करनेवाला है, वे भी शुद्ध आत्मा है। ये (युद्ध करना) तेरे लिए निश्चित (कर्म फल) है, इसलिए तुम्हें यह कार्य आत्मा की जागृति मैं रहकर करना है। इस जागृति मैं रहकर अगर तुम लड़ाई करते हो तो तुम नए कर्म नहीं बाँधोगे और पुराने कर्म खत्म कर पाओगे, जिससे तुम्हारा मोक्ष होगा"।

इस तरह अर्जुन, भगवान श्री कृष्ण द्वारा दी हुई जागृति में रहे। उन्होंने युद्ध में अनेक लोगों को मार डाला फिर भी एक कर्म नहीं बाँधा और उसी जन्म में आत्यंतिक मोक्ष पाया।

भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन, "जन्माष्टमी" का उत्सव, त्रिमंदिर में मनाया जाता है।

360 डिग्री पैनरैम द्वारा त्रिमिंदर की दाहिनी ओर गर्भगृह मे विराजमान श्री कृष्ण भगवान के दर्शन करे और उनके साथ श्री नाथजी, श्री तीरूपति बालाजी और गरूड देव भी विराजमान हैं।

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