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क्लेश रहित जीवन किस प्रकार जियें।

आप प्रतिदिन अपने जीवन में अवश्य ही बहुत सारे टकरावों का सामना करते होंगे।, उदाहरण के तौर पर

  • जब आपका बॉस आपको आदेश (हुक्म) देता रहता है।
  • जब आपके दोस्त और सहकर्मी आपका साथ नहीं देते हैं।
  • जब आपके कर्मचारी आपके कहने के अनुसार काम नही करते हैं।
  • जब आपके माता-पिता, समय के साथ नही बदलते हैं।
  • जब आपके बच्चे आपकी बात नहीं मानते हैं।
  • जब आपका जीवनसाथी आपसे बहस करता है।

और यही कारण हो सकता है कि आप, क्लेश रहित जीवन कैसे जियें, इसी समस्या के समाधान की खोज में यहाँ पर आए हैं।

यदि आप रोज़ रोज़ के क्लेश से थक चुके हो, तो आप क्लेश रहित जीवन जीने के लिए क्या कर सकते हैं?

दूसरे के दृष्टिकोण व मान्यता को अस्वीकार करने से टकराव उत्पन्न होता है और आगे चलकर यही टकराव हमारे रिश्तों में क्लेश का कारण बनते हैं।

"टकराव टालो " यदि आपने परम पूज्य दादा भगवान के इस वाक्य को अपने जीवन मे पूरी तरह से उतार लिया (आत्मसात कर लिया) तो आपका काम हो जाएगा! बस आवश्यकता है ईमानदारी और निश्चय की। आपके भीतर अनंत शक्तियां हैं जो सभी प्रकार के टकराव का समाधान ला सकती हैं , चाहे वे कितने भी गंभीर क्यों न हों।

आपका दृढ़ निश्चय और यह वचन बल आपके सभी कार्यों को पूर्ण करेगा। यह दृढ़ निश्चय करें “चाहे विरोधी कितना भी दृढ़ क्यों ना हो मैं किसी भी कीमत पर उससे नहीं टकराऊंगा।”

जब आप कहते हैं, "टकराव टालो" इसका क्या अर्थ है?

जब लोग ट्रैफ़िक के नियमों का पालन करते हैं तब सड़क पर ट्रैफ़िक के चलने में कोई कठिनाई नहीं आती,है न? इसी तरह, यदि आप प्रतिदिन प्रकृति के नियमों का पालन सही तरह से करते रहे, तब आप टकराव को रोक पाते है व् टकराव मुक्त जीवन व्यतीत कर पाते हैं। लेकिन समस्या तब आती है जब आप जीवन के नियमों को सीमित दृष्टि से देखते हैं। टकराव तब उत्पन्न होते हैं जब आप अपने नियमों और समझ का ही अनुसरण करते हैं और टकराव टालने के तरीकों को नहीं जानते हैं।

मान लो, आप रेलगाड़ी से उतरे और आपने अपना सामान उतारने के लिए किसी को मदद के लिए ढूँढा। कुछ कुली आपके सामने भागते हुए आते है और आप उनमे से एक को अपना सामान उठाने को कहते हो। वह आपका सामान बाहर तक ढो कर ले तो जाता है लेकिन उसे पैसे देते समय, आपका उसके साथ झगड़ा हो जाता है, "तु तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझसे इतने पैसे मांगने की? " लोगों को हर समय एक दूसरे से टकराने की आदत होती है। ऐसी बातों में विवाद में नहीं पड़ना चाहिए। अगर वह २५० रुपये मांगता है, तो आप आराम से समझौता करने का प्रयत्न करें।

"सुनो भाई, वास्तव में तो यह काम १०० रुपये का ही है लेकिन तुम २०० रुपये ले लो!" आपको कुछ पैसे देकर मामले को शांत करें या सुलझाए। यह टकराने की जगह नहीं है। यदि आपके सामने कमज़ोर है तो हो सकता है वह जाने दे और उसे अपनी कमज़ोरी के कारण दुःख हो लेकिन वह अंदर ही अंदर आपके प्रति द्वेष बांध लेगा। यह द्वेष प्रतिशोध के बीज को परिणाम देने वाले फल के रूप में परिवर्तित कर सकता है जो अगले जन्म में परिणाम देगा। प्रत्येक मनुष्य, वास्तव में प्रत्येक जीव से वैर बांधने में सक्षम है।

वहीं दूसरी ओर जब कोई आपके पास आए और कठोर व् कटु शब्दों का प्रयोग करने लगे तो आपको सतर्क हो जाना है और उस व्यक्ति के साथ टकराव में आने से भी बचना है। आपको अंदर अप्रसन्नता महसूस होगी जो हो सकता है आपको परेशान करे। इसलिए आपको समझ जाना चाहिए कि यह व्यक्ति आपके मन को प्रभावित कर रहा है और यह समझकर आपको उसके रास्ते से हट जाना चाहिए। यह टकराव स्पंदन के रूप में है। इसलिए टकराव टालो।

भले ही कोई व्यक्ति बहुत बात करे या अपशब्द बोले, उसके शब्द हमारे भीतर संघर्ष को उत्पन्न नहीं करने चाहिए। इस सिद्धांत का पालन करना ही आपका धर्म है। शब्द इस शर्त के साथ नहीं आते कि वो टकराव करेंगे। जिन शब्दों से आप परेशान होते हैं उन शब्दों को आपको एक तरफ़ कर देना चाहिए और उन्हें भूल जाना चाहिए। जो ऐसा कर सकता है ,वही मनुष्य कहलाने के योग्य है।

और अपने अहंकार को शांत करने के लिए अपने शब्दों से किसी को दुःख पहुँचाना सबसे बड़ा अपराध है। कभी ऐसा मत करना ।

जैसे-जैसे आपकी समझ बढ़ेगी, आप टकराव टालने में सक्षम रहेंगे।

आप टकराव टालने के लिए निम्नलिखित पद्धतियों का उपयोग भी कर सकते हैं:

  • अंदर से ऐसा दृढ़ निश्चय करो कि मुझे दीवार से नहीं टकराना है। मै अभिप्रायो की भिन्नता के कारण भेदभाव में नहीं पड़ना चाहता।
  • यदि आप बाहर से टकराते हो, फिर भी टकराव के समय आपके अंदर का भाव यह होना चाहिए कि मै किसी के साथ टकराना नहीं चाहता हूँ ।
  • दूसरे के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करें। आपको तब अनुभव होगा जब आप भी ऐसी ही किसी परिस्थिति में होंगे और कोई आपके साथ टकराव में आने के बजाय आप के साथ एडजस्ट करेगा, तब आपको वास्तव में राहत महसूस होगी। इसलिए जब दूसरा व्यक्ति उसी स्थिति से गुज़र रहा है तब अगर बदले में आप ऐसा ही व्यवहार करेंगे, तो आप ना केवल टकराव टाल पाएंगे बल्कि रिश्तों को भी अच्छा रख पाएंगे।
  • यदि कोई आपको कहे यह आपका दोष है, उसे स्वीकार करो और बोलो, “आप सही कह रहे हो। मुझे यह गलती बताने के लिए आपका धन्यवाद।“
  • टकराव से बचने के लिए सभी के साथ एडजस्टमेंट लेना शुरू कर दें।
  • सामनेवाले की प्रकृति को पहचाने। ऐसा करने से, आप जान पाएंगे की सामने वाला अलग-अलग परिस्थितियों में ऐसा क्यों व्यवहार करते है। जब वे परिस्थितयां उत्पन्न होंगी तब यह आपको स्थिर रहने में मदद करेगी।
  • सामनेवाले व्यक्ति से सहमत होने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए होना है क्योंकि आपको उसके साथ टकराव टालना है और मुक्त होना है। निःसंदेह सामने वाला भी अपने दृष्टीकोण से सही है।
  • यदि कोई आप पर चिल्लाये, आरोप लगाए या अपशब्दों से बुलाएँ , तो आपको वह उसे वापस देने से बचना ही है। इसके बजाय अपशब्दों व दुःख पहुँचाने वाले शब्दों के उपयोग से बचने के लिए, अपने भीतर बैठे परमात्मा से शक्ति मांगनी चाहिए:
    “हे दादा भगवान! मुझे, किसी भी देहधारी जीवात्मा के साथ कभी भी कठोर भाषा, तंतीली भाषा न बोली जाए, न बुलवाई जाए या बोलने के प्रति अनुमोदना न की जाए, ऐसी परम शक्ति दीजिए।
    कोई कठोर भाषा, तंतीली भाषा बोले तो मुझे, मृदु-ऋजु भाषा बोलने की शक्ति दीजिए।“
  • आप इस तरह कहकर भी टकराव को टाल सकते हैं: “आप जो कह रहे है वह मुझे अच्छा लगा लेकिन मुझे कुछ समय सोचने के लिए चाहिए। “
  • यदि कोई झगड़ा करता है, तब आपको उसके साथ सहानुभूति रखनी है ," अरे ! अंदर इतनी कुढ़न (बेचैनी) है इसलिए उससे झगड़ा हो जाता है। जो बेचैन होने लगते हैं वह सब कमजो़र होते हैं।
  • आपकी सावधानी व निश्चय के बाद भी सामने वाला व्यक्ति आपसे टकरा सकता है और आपको दु:ख दे सकता है। यदि आप किसी को थोड़ा सा भी दु:ख नहीं देते हैं और ख़ुशी से दूसरों का दिया दुःख स्वीकार करते हैं, तब आपका पिछले कर्मों का हिसाब पूर्ण होगा और आप मोक्ष प्राप्त कर सकेंगे।
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