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प्रतिक्रमण ही टकराव टालने की एक मात्र दवाई है?

प्रश्नकर्ता : तब उस टकराव को टालने का उपाय केवल प्रतिक्रमण ही है या कुछ और भी है?

दादाश्री : दूसरा कोई हथियार है ही नहीं। ये हमारी नौ कलमें, वे भी प्रतिक्रमण ही हैं। अन्य कोई हथियार नहीं है। इस दुनिया में प्रतिक्रमण के सिवा और कोई साधन नहीं है। वह उच्चतम साधन है। क्योंकि संसार अतिक्रमण से खड़ा हुआ है।

प्रश्नकर्ता : यह तो कितना विस्मयकारक है! 'हुआ सो न्याय', 'भुगते उसी की भूल', ये जो वाक्य हैं, वे एक-एक अद्भुत वाक्य हैं। और दादाजी की साक्षी में प्रतिक्रमण करते हैं न, तो उनके स्पंदन पहुँचते ही हैं।

दादाश्री : हाँ, सही है। स्पंदन तुरंत ही पहुँच जाते हैं और उनके परिणाम आते हैं। हमें भरोसा होता है कि यह असर हुआ लगता है।

प्रश्नकर्ता : लेकिन दादाजी, प्रतिक्रमण तो इतनी तेज़ी से हो जाते हैं, उसी क्षण! यह तो गज़ब है, दादाजी!! यह दादाजी की कृपा गजब की है!!!

दादाश्री : हाँ, यह गज़ब है। साइन्टिफिक चीज़ है।

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