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टकराव टालो- क्या इसका मतलब सहन करना है?

प्रश्नकर्ता : दादा, आपने जो टकराव टालने को कहा, इसका अर्थ 'सहन करना' ऐसा होता है न?

दादाश्री : टकराव टालना यानी सहन करना नहीं है। सहन करोगे तो कितना करोगे? सहन करना और 'स्प्रिंग' दबाना, वे दोनों एक से हैं। 'स्प्रिंग दबाई हुई कितने दिन रहेगी?' इसलिए सहन करना तो सीखना ही नहीं। सोल्यूशन लाना सीखो। अज्ञान दशा में तो सहन ही करना होता है। बाद में एक दिन 'स्प्रिंग' उछलती है, वह सब बिखेर देती है, लेकिन यह तो कुदरत का नियम ही ऐसा है।

दुनिया में किसी के कारण हमें सहन करना पड़े, ऐसा कानून ही नहीं है। किसी के कारण यदि हमें सहन करना पड़े, वह अपना ही हिसाब होता है। लेकिन आपको पता नहीं चलता कि यह किस बहीखाते का और कहाँ का माल है, इसलिए हम ऐसा मानते हैं कि इसने नया माल देना शुरू किया है। नया माल कोई देता ही नहीं, दिया हुआ ही वापस आता है। हमारे ज्ञान में सहन करने का होता ही नहीं। ज्ञान से समझ लेना कि सामनेवाला 'शुद्धात्मा' है। यह जो आया, वह मेरे ही कर्म के उदय से आया है, सामनेवाला तो निमित्त है। फिर अपने लिए यह 'ज्ञान' इटसेल्फ ही पज़ल सॉल्व कर देगा। 

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