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त्रिमंत्र का उच्चारण करने के क्या फायदे हैं?

प्रश्नकर्ता : ऋषभदेव भगवान ने मंदिर बाँटने को कहा मगर मंदिरो में सभी देवता तो एक ही हैं न?

दादाश्री : नहीं, देवता सारे भिन्न-भिन्न हैं। सभी के शासनदेव भी अलग हैं। संन्यस्त मंत्र के शासनदेव अलग होते हैं, अन्य मंत्रों के शासनदेव अलग होते हैं, सभी देव अलग-अलग होते हैं।

प्रश्नकर्ता : लेकिन तीनों मंत्र एक साथ बोलने से क्या फायदा?

दादाश्री : अड़चनें चली जाती हैं न! व्यवहार में अड़चनें आती हों तो कम हो जाती हैं। पुलिसवाले से साधारण पहचान हो तो छूट जाते हैं या नहीं छूट जाते?

प्रश्नकर्ता : हाँ, छूट जाते हैं।

दादाश्री : तो इस त्रिमंत्र में जैन, वासुदेव और शिव के तीनों मंत्रों का समन्वय किया है। यदि आप देवों का सहारा चाहते हो तो तीनों मंत्र साथ में बोलना। उनके शासनदेव होते हैं, जो आपकी सहायता करेंगे। इस त्रिमंत्र में जैन का मंत्र है, वह जैनों के शासनदेवों को खुश करने का साधन है। वैष्णव का मंत्र उनके शासनदेवों को खुश करने का साधन है और शिव का जो मंत्र है वह उनके शासनदेवों को खुश करने का साधन है। प्रत्येक धर्म के पीछे हमेशा शासन की रक्षा करनेवाले देव होते हैं। ये मंत्रों को बोलने से वे देव खुश हो जाते हैं, इससे हमारी अड़चनें दूर हो जाती हैं।

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