क्या आपको भी गुस्सा आता है?
हमें अनेक परिस्थितियों में आम तौर पर क्रोध आ जाता है, क्योंकि हम नहीं जानते की उस परिस्थिति का सामना कैसे करना है। तो, क्रोध का समाधान कैसे लाएँ?
“क्रोध ना करो”, “क्रोध को बंद करो” और “क्रोध को काबू में लो” सामान्य तौर पर लोग ऐसा कहते रहते हैं। लेकिन क्रोध अपने-आप ही कैसे बंद होगा? क्रोध तो परिणाम है, इफ़ेक्ट है! कारणों का सेवन करने से परिणाम उत्पन्न हुए हैं। क्रोध को दबानें पर एक-दो बार ऐसा लगता तो है कि अब क्रोध शांत हो गया है, लेकिन फिर बाद में जैसे स्प्रिंग उछलती है उसी तरह से दोगुना क्रोध फिर से भड़क उठता है। इसलिए सच में तो क्रोध के कारणों को बंद करें, तो ही क्रोध बंद होता है!
क्रोध वह कमजोरी है। क्रोध कब आता है? सामान्य तौर पर जब सामने वाला हमारी बात नहीं समझता, पॉइंट ऑफ व्यू में डिफरेंस हो, हमारी इच्छा के विपरीत काम हो, जो पसंद न हो वो हो जाए, कोई नुकसान हो जाए, कोई हमारा अपमान कर दे या गलत आरोप लगे तब हमें क्रोध आता है। कई बार जब आगे का कुछ नजर नहीं आता, क्या करना है यह समझ में नहीं आता तब भी क्रोध आ जाता है। क्रोध जब अंदर ही अंदर उठता है, तब हमें (खुद को) बहुत ज़बरदस्त भगौटा आता है। लेकिन जाने-अनजाने में जब कभी किसी व्यक्ति पर क्रोध निकल जाता है, तब सामनेवाले को बहुत दुःख हो जाता है। इस क्रोध की सीमा क्या होनी चाहिए? परम पूज्य दादा भगवान कहते हैं कि हमारा क्रोध सामने वाले को दुःखदायी न हो जाए, वही क्रोध की सीमा। हमारे क्रोध से सिर्फ़ हमें ही दुःख हो, लेकिन दूसरों को दुःख ना दे तो इतना क्रोध चलाया जा सकता है।
पति-पत्नी, माता-पिता-बच्चे, बॉस-नौकर के बीच एक-दूसरे को न समझ पाने के कारण समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। हर संबंध में सामनेवाला ही गलत करता है ऐसा, हमें लगता है इसलिए हम डाँटकर, क्रोध करके सामने वाले को सुधारने की कोशिश करते हैं। नतीजतन, टकराव, क्लेश और मतभेद बढ़ जाते हैं। बात बोलचाल बंद होने तक पहुँच जाती है। और एक ही छत के नीचे रहते हुए भी एक-दूसरे से बात ही नहीं होती। कभी-कभी तो रिश्तों में पड़ी दरार भर जाती है पर कभी पूरी जिंदगीभर वह दरार नहीं भर पाती।
परम पूज्य दादा भगवान कहते हैं कि, ”आज ही क्रोध बंद नहीं हो जाएगा। क्रोध को तो पहचानना पड़ेगा, कि क्रोध क्या है? क्यों उत्पन्न होता है? अगर ऐसे ही क्रोध को बंद करना चाहते हैं तो वह किस तरह से होगा?” यहाँ हमें प्रैक्टिकल उदाहरणों के साथ क्रोध, उसके स्वरूप, उसके कारण, उससे होने वाले नुकसान और उससे बाहर निकलने के उपायों की विस्तृत समझ मिलती है। इस समझ के जरिए, क्रोध पर बाहर से नियंत्रण लगाने की बजाय, अंदर से बदलाव करके क्रोध से मुक्ति पाने की अचूक चाबी मिलती है।


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