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भगवान कौन है?

इस दुनिया में, यदि आपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, तो लोग आपको इंजीनियर कहते हैं; और यदि आप किसी रोगी का निदान, संरक्षण और उपचार करते हैं, तो लोग आपको डॉक्टर कहते हैं, क्या ऐसा नहीं है?

इसी तरह, एक:

  • जिनके क्रोध-मान-माया-लोभ-अहंकार-राग- द्वेष नष्ट हो गये है,
  • जिसे अपने देह से कोई राग नहीं है,
  • जिनके भीतर भगवान के गुण पूरी तरह से प्रकट हो गए हैं,
  • जिसने भगवान की स्थिति प्राप्त कर ली है,

लोग ऐसे व्यक्ति को भगवान कहते हैं।

हालाँकि, हमारी सही समझ के लिए, भगवान कृष्ण, भगवान महावीर, भगवान राम ने बहुत ही स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया है कि:

'जो आप अपनी आँखों से देख सकते हैं वह भगवान नहीं है। जिसको आप भगवान के रूप में संदर्भित करते हैं वह नश्वर है; भगवान यह शरीर बिल्कुल नहीं है। शरीर केवल बाहरी पैकिंग है जो अस्थायी है और एक दिन नष्ट हो जाता है। वह जो भीतर है, जो शाश्वत तत्व के रूप में रहते है वह परमात्मा है - जिसे हम भगवान कहते हैं।'

आत्मा प्रत्येक जीवमात्र में एक शाश्वत तत्व है। शुद्ध आत्मा वही भगवान है!

भगवान महावीर, भगवान राम, भगवान कृष्ण, और ज्ञानी पुरुष के भीतर का भगवान जागृत है। उनके नश्वर देह में, उन्होंने अविनाशी भगवान को देखा, जाना और अनुभव किया! इसलिए, उन्हें ज्ञानी पुरुष कहा जाता है।

  • उन्होंने महसूस किया कि, 'मैं शुद्ध आत्मा हूं' और बाकी सब कुछ सापेक्ष है, कोई चीज के आधारित है और काल्पनिक है।
  • उन्होंने यह जानकर स्वयं को सभी कष्टों और पीड़ाओं से मुक्त कर लिया कि सभी कष्ट शरीर से संबंधित हैं न कि स्वयं से।
  • इस आत्मज्ञान प्राप्ति के बाद, उन्होंने नए कर्मों को बांधना बंद कर दिया और धीरे-धीरे अपने अगले जन्मे के कर्मों को पूरा कर रहे हैं, सभी जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होने के लिए और मोक्ष प्राप्ति के लिए!

हमारा पूरा जीवन, हम भगवान की पूजा करते हैं, लेकिन बिना यह जाने कि 'भगवान कौन है?'

भगवान की पूजा करने के लिए, हमें पहले भगवान को जानना चाहिए। भगवान को जानने के लिए, हमें सबसे पहले यह पहचानना चाहिए कि वास्तविक भगवान कौन है ...

वे आत्मज्ञानी, जिन्हें हम बहुत प्यार, विश्वास और श्रद्धा के साथ पूजते हैं, हमेशा एक बात पर जोर देते हैं, खुद को जानिए [आत्मा को जानो, भगवान को जानो]। अपने कर्मों को समाप्त करके अपने आप को सभी दर्द और पीड़ाओं से मुक्त करे और मोक्ष प्राप्त करे।

वे खुद [आत्मज्ञान] के रास्ते पर चले और लोगों को रास्ता दिखाया, लेकिन तब से लोग उस रास्ते से मोड़ गए। उन्होंने भगवान के नाम पर अलग-अलग धर्म और समूह बनाए हैं।

केवल जब हमने भगवान को पहचाना है, तब हमें पता चलता है कि 'भगवान राम केवल मेरे भीतर में ही हैं, मेरी शुद्ध आत्मा ही असली भगवान राम है, मेरी शुद्ध आत्मा ही भगवान महावीर, भगवान कृष्ण (या किसी अन्य भगवान की वास्तविक रूप है जिसे आप प्रतिदिन पूजते हैं। )। '

लेकिन हम भगवान को कैसे पहचानते हैं?

जब आप मानते हैं कि मैं जॉन हूं (पाठक को यहाँ अपना नाम डालना चाहिए), तो आपको अपने सच्चे स्व के बारे में अज्ञान की स्थिति में, एक साधारण जीव कहा जाता है। लेकिन जब आपको पता चलता है कि “मैं जॉन नहीं हूँ, मैं एक शुद्ध आत्मा हूँ। मैं इस शरीर या इस नाम के रूप में नहीं हूँ, मैं शुद्ध आत्मा के रूप में हूँ । आप भगवान को पहचानते हैं। यह वह परम ज्ञान है जिसके द्वारा व्यक्ति भगवान बनता है।

इस दुनिया में, केवल एक आत्मज्ञानी ही हमें यह एहसास दिला सकता है कि भगवान कौन है। जैसा कि हम जानते हैं, भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवान का एहसास कराया। हालांकि, ऐसे आत्मज्ञानी से मिलने और उससे यह वास्तविक ज्ञान प्राप्त करने के लिए उसकी कृपा प्राप्त करना आसान नहीं है। ऐसा करने के लिए जबरदस्त पुण्य कर्म की आवश्यकता होती है, तभी एक वर्तमान आत्मज्ञानी से मिलने की परिस्थितियाँ एक साथ आती हैं।

इसलिए, हालांकि एक आत्मज्ञानी से मिलना बिल्कुल आवश्यक और लाभदायक है, फिर भी यह हमारे जीवन में सबसे कठिन घटनाओं में से एक है।

ऐसा करने के लिए, हम जिस भगवान की उपासना करते हैं, उनके एक ‘भक्त’ के रूप में मानते हुए, हमें निश्चित रूप से और लगातार अपनी पूरी इच्छा व्यक्त करनी चाहिए कि हम ज्ञानी से मिलना चाहते हैं, जो आत्माज्ञान प्राप्त व्यक्ति है; और उससे आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करें।

एक बार ऐसा होने पर, हम ठीक से समझ जाएँगे कि भगवान कौन है। इसके बाद, एक ‘ज्ञानी भक्त’ के रूप में, जैसा कि हम ज्ञानी के निर्देशों के बाद दिखाए गए मार्ग पर चलना शुरू करते हैं, हम वास्तविक रूप में भगवान की पूजा करना सीखते हैं; और एक दिन स्वयं परमेश्वर बन जाएँगे!

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