शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए दूसरों के साथ एडजस्ट करना सीखना अनिवार्य है। परम पूज्य दादा भगवान के अनुसार, जो व्यक्ति दूसरों के साथ एडजस्टमेंट लेना जानता है, वह कभी दुःखी नहीं होता। परम पूज्य दादाश्री हमें यह मार्गदर्शन देते हैं, ”’एडजस्ट एवरीव्हेर’ इतना ही शब्द यदि आप जीवन में उतार लोगे तो बहुत हो गया। आपको अपने आप शांति प्राप्त होगी। शुरुआत में छ: महीनों तक अड़चनें आएँगी, बाद में अपने आप ही शांति हो जाएगी।“ इसलिए, एडजस्ट होने के इस सूत्र से आगे चलकर आपको शांति मिलेगी, हलाँकि शुरुआत में पिछले रिएक्शन के कारण कुछ कठिनाइयाँ आ सकती हैं।

परम पूज्य दादाश्री कहते हैं, ”प्रत्येक के साथ एडजस्टमेंट हो जाए, यही सब से बड़ा धर्म है।“ लोगों के अलग-अलग व्यक्तित्व, लक्षण और प्रवृत्तियों को देखते हुए, यदि हम यह अपेक्षा रखें कि हर व्यक्ति हमारी इच्छा के अनुसार ही चले, तो हम जीवन शांति से कैसे जी सकते हैं? इसलिए, दूसरों के साथ एडजस्ट हो जाना और अपने मन की शांति बनाए रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
जरा, खुद को इन परिस्थितियों में रखकर सोचिए कि, आप क्या करते हैं और क्यों करते हैं?
क्योंकि आपको तनख्वाह मिलती है, जो कि आपका घर चलाने में आपकी मदद करती है।
ताकि गाड़ी को नुकसान न पहुँचे और आपको चोट भी न लगे।
क्योंकि आपके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता और आप वहाँ पर सिर्फ़ कुछ समय के लिए होते हैं।
क्योंकि आप जानते हैं कि आप मौसम को नहीं बदल सकते, आपके पास और कोई विकल्प नहीं है।
ताकि आपको बदबू न आए।
क्योंकि आप जानते हैं कि आप मौसम को नहीं बदल सकते हैं, उस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है।
क्योंकि वहाँ गिरने और चोट लगने की संभावना होती है।
इन सभी उदाहरणों में हम सब कुछ जानते हुए भी परिस्थितियों के साथ एडजस्टमेंट लेते हैं, क्योंकि हम अच्छी तरह से जानते हैं कि यदि हम ऐसा नहीं करेंगे, तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं। ठीक इसी प्रकार, यदि हम जीवन में अपने आसपास के लोगों और परिस्थितियों के साथ समझदारी से एडजस्ट कर लें, तो हम खुद को बेवजह की बहुत सी परेशानियों से बचा सकते हैं। इससे हम शांतिपूर्ण जीवन जी सकते हैं।
परम पूज्य दादा भगवान के शब्दों में,“सामने वाला ‘डिसएडजस्ट’ होता रहे, पर आप एडजस्ट होते रहोगे, तो संसार-सागर तैरकर पार उतर जाओगे। जिसे दूसरों के साथ अनुकूल होना आ जाता है, उसे कोई दु:ख ही नहीं रहता।“
जब आप एडजस्टमेंट नहीं ले पाते, तब दोतरफ़ा नुकसान होता हैं। आपको भी दुःख होता है और सामने वाले को भी। इसलिए, किसी भी नुकसान से बचने के लिए जीवन में एडजस्ट करना सीखें।
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