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लोगों के साथ कैसे एडजस्ट हों?

बांद्रा की खाड़ी में से दुर्गंध आए, तो उसके साथ क्या लड़ने जाएँगे? इसी प्रकार ये मनुष्य भी दुर्गंध फैलाते हैं, उन्हें कुछ कहने जाएँगे? दुर्गंध फैलाए वे सभी खाडि़याँ कहलाती हैं और जिनमें से सुगंध आए वे बा़ग कहलाते हैं। जो-जो दुर्गंध देते हैं, वे सभी कहते हैं कि 'आप हमारे प्रति वीतराग रहो!'

यह तो अच्छा-बुरा कहने से वे हमें सताते हैं। हमें तो दोनों को समान कर देना है। इसे 'अच्छा' कहा, इसलिए वह 'बुरा' हुआ। तब फिर वह सताता है। लेकिन दोनों का 'मिक्स्चर' कर डालें, तो फिर असर नहीं रहता। 'एडजस्ट एवरीव्हेर' की हमने खोजबीन की है। सच बोल रहा हो उसके साथ भी और कोई झूठ बोल रहा हो उसके साथ भी 'एडजस्ट' हो जा। हमें कोई कहे कि 'आपमें अ़क्ल नहीं है।' तब हम तुरंत उससे एडजस्ट हो जाएँगे और उसे कहेंगे कि, 'वह तो पहले से ही नहीं थी। आज तू कहाँ से खोजने आया है? तुझे तो आज मालूम हुआ, लेकिन मैं तो यह बचपन से ही जानता हूँ।' ऐसा कहें तो झंझट मिट जाएगा न? फिर वह हमारे पास अ़क्ल खोजने ही नहीं आएगा। ऐसा नहीं करें तो 'अपने घर' (मोक्ष) कब पहुँचेंगे?

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