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सती की सही परिभाषा क्या है?

पति नहीं हो, पति चला गया हो, कुछ भी हो जाए, फिर भी दूसरे के पास जाए नहीं। वह चाहे जैसा भी हो, खुद भगवान पुरुष होकर आए हों, पर नहीं। 'मेरे लिए मेरा पति है, पतिवाली हूँ' वह सती कहलाती है। आज सतीत्व कह सकें ऐसा है इन लोगों का? हमेशा नहीं है ऐसा, नहीं? जमाना अलग तरह का है न! सत्युग में ऐसा समय कभी ही आता है, सतियों के लिए ही। इसलिए सतियों का नाम लेते हैं न अपने लोग!

सती होने की इच्छा से उसका नाम लिया हो तो कभी सती बने परंतु आज तो विषय चूडि़यों के भाव बिकता है। यह आप जानते हैं? समझे नहीं मैं क्या कहना चाहता हूँ?

प्रश्नकर्ता : हाँ, चूडि़यों के मोल बिकता है।

दादाश्री : कौन-से बाज़ार में? कॉलेजों में! किस मोल बिकती हैं? सोने के दाम चूडि़याँ बिकती हैं! हीरों के दाम चूडि़याँ बिकती हैं! सब जगह ऐसा नहीं मिलता। सब जगह ऐसा नहीं है। कुछ लड़कियाँ तो सोना दें तो भी न लें। चाहे कुछ भी दें तो भी न लें! पर दूसरी तो बिक भी जाती हैं, आज की स्त्रियाँ। सोने के भाव नहीं हो तो दूसरे किसी दाम पर भी बिकती हैं!

(कोई स्त्री) पहले से सती न हों किन्तु बिगड़ जाने के बाद भी सती हो सकती हैं। जब से निश्चय किया तब से सती हो सकती हैं।

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