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विवाहित जीवन में विषय संबंधी वफादारी की परिभाषा क्या है?

जिसने शादी की है, उसके लिए तो हमने एक ही नियम रखा है कि तुझे दूसरी किसी स्त्री की ओर दृष्टि नहीं बिगाड़नी है। यदि कभी दृष्टि ऐसी हो जाए तो प्रतिक्रमण करके तय करना कि ऐसा फिर से नहीं करूँगा। खुद की स्त्री के सिवाय दूसरी स्त्री को देखता नहीं, दूसरी स्त्री पर जिसकी दृष्टि रहती नहीं है, दृष्टि जाए फिर भी उसके मन में विकारी भाव होता नहीं, विकारी भाव हो तो खुद बहुत पछतावा करता है, वह इस काल में एक स्त्री होने के बावजूद भी ब्रह्मचर्य कहलाता है।

आज से तीन हजार साल पहले हिन्दुस्तान में सौ में से नब्बे मनुष्य एक पत्नीव्रत का पालन करते थे। एक पत्नीव्रत और एक पतिव्रत का पालन, कैसे अच्छे मनुष्य कहलाएँ वे! जब कि आज शायद ही हज़ार में एक होगा!

प्रश्नकर्ता : मान लीजिए कि दो वाइफ हों तो वह क्यों खराब है?

दादाश्री : रखो न दो वाइफ। रखने में हर्ज नहीं है। पाँच वाइफ रखो तो भी हर्ज नहीं है। लेकिन दूसरी किसी पर दृष्टि नहीं बिगाड़ो, दूसरी स्त्री जा रही हो, उस पर दृष्टि बिगाड़े तो बुरा कहलाए है। कुछ नीति-नियम तो होने चाहिए न?

दूसरी बार ब्याहने में हर्ज नहीं है। मुसलमानों ने एक कानून निकाला कि बाहर दृष्टि बिगाड़नी नहीं चाहिए। बाहर किसी को छेड़ना नहीं चाहिए। यदि आप एक स्त्री से संतुष्ट नहीं हैं तो दो कीजिए। उन लोगों का कानून है कि चार तक आपको छूट है! और यदि अनुकूलता है तो चार कीजिए न? कौन मना करता है? लोग भले ही चिल्लाएँ! परन्तु अपनी स्त्री को दुःख नहीं होना चाहिए।

इस काल में एक पत्नीव्रत को हम ब्रह्मचर्य कहते हैं और तीर्थंकर भगवान के समय में ब्रह्मचर्य का जो फल प्राप्त होता था, वही फल उन्हें प्राप्त होगा, उसकी हम गारन्टी देते हैं।

प्रश्नकर्ता : एक पत्नीव्रत जो कहा, वह सूक्ष्म में या मात्र स्थूल ही? मन तो जाए ऐसा है न?

दादाश्री : सूक्ष्म से भी होना चाहिए। कभी मन जाए तो मन से अलग रहना चाहिए और उसके प्रतिक्रमण करते रहना चाहिए। मोक्ष में जाने की लिमिट (मर्यादा) क्या? एक पत्नीव्रत और एक पतिव्रत। एक पत्नीव्रत या एक पतिव्रत का कानून हो, वह लिमिट कहलाता है।

जितने श्वासोच्छवास अधिक खर्च हों, उतना आयुष्य कम होता है। श्वासोच्छवास किसमें अधिक खर्च होते हैं? भय में, क्रोध में, लोभ में, कपट में और उनसे भी ज्यादा स्त्री संग में। उचित स्त्री संग में तो बहुत अधिक खर्च हो जाते हैं मगर उससे भी कहीं अधिक अनुचित स्त्री संग में खर्च हो जाते हैं। मानो कि सारी फिरकी ही एकदम से खुल जाए!

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