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टकराव टालने का दृढ़ निश्चय करें और सुख-शांति से जीएँ

'टकराव टालो' यह एक ही सूत्र यदि जीवन में सीधा उतर गया, उसका संसार तो सुंदर हो ही जाएगा, साथ ही मोक्ष भी सीधे सामने चलकर आएगा। यह निर्विवाद वाक्य है!

अक्रम विज्ञानी संपूज्य दादाश्री द्वारा दिए गए इस सूत्र को अपनाकर कितने ही लोग पार उतर गए। उनके जीवन सुख-शांतिमय बने और वे मोक्ष के राही बन गए! इसके लिए हर एक को मात्र दृढ़ निश्चय करना है कि 'मुझे किसी से टकराव में नहीं आना है। सामनेवाला खूब टकराना चाहे, फिर भी मुझे नहीं टकराना है, कुछ भी करके।' बस, इतना सा जिसका निश्चय होगा, उसे कुदरती रूप से अपने आप भीतर से ही टकराव टालने की सूझ पड़ने लगेगी!

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