ब्रह्मचर्य का पालन कैसे करें?

क्या आपको चोरी करना पसंद है? क्या आपको झूठ बोलना अच्छा लगता है? क्या आपको हत्या करना अच्छा लगता है? नहीं? तो फिर इस विषय में ऐसा क्या है कि आप इसें पसंद करते हैं। ये मात्र गलत मान्यता के कारण है। लोगों ने कहा इसलिए आपने विश्वास किया कि विषय में सुख है, लेकिन यह सच नहीं है।

निष्पक्षपाती रूप से सोचें कि क्या आपकी किसी भी इन्द्रिय को विषय पसंद है ? क्या आँखों को पसंद है? क्या कान इसे सुनना पसंद करते हैं? क्या जीभ को यह मीठा लगता है? नाक को तो पसंद होगा, नहीं ? किसी भी इन्द्रिय को यह पसंद नहीं है।

मनुष्यों को विषय के परिणाम और ब्रह्मचर्य से होनेवाले फायदों को समझना चाहिए। मात्र एक बार के ही विषय में, भले ही वह अपनी पत्नी के साथ हो, करोड़ों जीव मर जाते हैं। और अपने जीवन साथी कि जिन के साथ आपने शादी की है उनके अलावा किसी अन्य के साथ विषय संबंध रखने का परिणाम तो नर्क है,

जब कि ब्रह्मचर्य स्वास्थ्य और आध्यात्मिक प्रगति के लिए अत्यंत सहायक है। ब्रह्मचर्य की सही और संपूर्ण समझ अंत में मोक्ष तक ले जाती है। ब्रह्मचर्य को सही तरह से समझने के बाद ही किसी व्यक्ति को ब्रह्मचर्य के रास्ते पर चलने की प्रेरणा मिलेगी और वह हर प्रकार से विषय का विरोध करेगा।

हर कोई इस बात से सहमत है कि ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, लेकिन यह करने के लिए क्या करना चाहिए?आज तक किसीने यह रास्ता नहीं दिखाया है।

इस पेज पर आपको मिलेगा ब्रह्मचर्य पालन करने का सीधा, स्पष्ट और सटीक रास्ता। अब्रह्मचर्य से होनेवाले नुक़सान और उसकी भयानकता को समझकर किसी को भी लगेगा, 'ओह, ऐसा तो मैं जानता ही नहीं था !'

Celibacy with Right Understanding

Sexual attraction other than your husband is against law. You should not have attraction to males in your mind also.

Spiritual Quotes

  1. ऐसा है न, जिसे सांसारिक सुखों की ज़रूरत है, भौतिक सुखों की जिसे इच्छा हैं, उसे शादी कर लेनी चाहिए। सब कुछ करना चाहिए और जिसे भौतिक सुख पसंद ही नहीं हों और सनातन सुख चाहिए, उसे शादी नहीं करनी चाहिए।
  2. विषय सारे विष हैं मगर बिलकुल विष नहीं हैं। विषय में निडरता विष है।
  3. अनंत अवतार की कमाई करें, तब उच्च गौत्र, उच्च कुल में जन्म होता है किन्तु लक्ष्मी और विषय के पीछे अनंत अवतार की कमाई खो देते हैं।
  4. जो हो गए हैं उन्हें लेट गो (जाने दें) करें पर नया तो होने ही नहीं दें न! हो गया है उसका कोई उपाय है क्या?
  5. शादी करनी नहीं और गलत छेड़-छाड़ करना वह तो भयंकर पाशवता कहलाए। वे तो नर्कगति के अधिकारी!
  6. किसी धर्म ने विकार को स्वीकार नहीं किया। विकार का स्वीकार करें वे वाममार्गी कहलाते हैं। पहले के समय में वाममार्गी थे। विकार के साथ ब्रह्म को खोजने निकले थे।
  7. व्यवहार तो आपकी पत्नी हो तो उसके साथ दोनों को समाधानकारी हो ऐसा व्यवहार रखना। आपका समाधान और उसका समाधान होता हो ऐसा व्यवहार रखना। उसका असमाधान होता हो और आपका समाधान हो ऐसा व्यवहार बंद करना। आपसे पत्नी को कोई दुःख नहीं होना चाहिए।
  8. यदि उसकी समझ में यह आए कि यह गर्भ में थी तब ऐसी दिखती थी, जन्म हुआ तब ऐसी दिखती थी, छोटी बच्ची थी तब ऐसी दिखती थी, बाद में ऐसी दिखती थी, अभी ऐसी दिखती है, बाद में ऐसी दिखेगी, बुड्ढी होने पर ऐसी दिखेगी, पक्षाघात हो जाए तो ऐसी दिखेगी, अरथी उठेगी तब ऐसी दिखेगी, ऐसी सभी अवस्थाएँ जिसके लक्ष्य में है, उसे वैराग्य सिखाना नहीं होता!
  9. यदि तू संसारी है तो तेरे ह़क का विषय भोगना, परंतु बिना ह़क का विषय तो मत ही भोगना, क्योंकि उसका फल भयंकर है।
  10. जिस संग में हम फँस जाएँ ऐसा हो उस संग से बहुत दूर रहना चाहिए, वर्ना एक बार फँसे कि बार-बार फँसते ही जाएँगे।

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