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क्या विवाहित लोग मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं?

यह विज्ञान किसी को भी, परिणीतों को भी मोक्ष में ले जाएगा। परंतु ज्ञानी की आज्ञा अनुसार चलना चाहिए। कोई दिमा़ग की खुमारीवाला हो, वह कहे, 'साहब, मैं दूसरी ब्याहना चाहता हूँ।' तो मै कहूं कि तेरी ताकत चाहिए। पहले क्या नहीं ब्याहते थे? राजा भरत को तेरह सौ रानियाँ थीं, फिर भी मोक्ष में गए! यदि रानियाँ बाधक होतीं तो मोक्ष में जाते क्या? तब क्या बाधक है? अज्ञान बाधक है।

विषय विष नहीं हैं, विषय में निडरता विष है। इसलिए घबराना नहीं। सभी शास्त्रों ने ज़ोर देकर कहा है कि सारे विषय विष हैं। कैसे विष है? विषय कहीं विष होता होगा? विषय में निडरता विष है। यदि विषय विष होता, तब फिर आप सभी घर में रहते हो और आपको मोक्ष में जाना हो तो मुझे आपको हाँकना पड़ता कि 'जाओ उपाश्रय में, यहाँ घर पर मत पड़े रहो।' पर मुझे किसी को हाँकना पड़ता है?

भगवान ने जीवों के दो भेद किए; एक संसारी और दूसरे सिद्ध। जो मोक्ष में गए हैं वे सिद्ध कहलाते हैं और अन्य सभी संसारी। इसलिए यदि आप त्यागी हैं तब भी संसारी हैं और यह गृहस्थ भी संसारी ही है। इसलिए आप मन में कुछ मत रखना। संसार बाधा नहीं डालता, विषय बाधा नहीं डालते, कुछ बाधा नहीं करता, अज्ञान बाधा डालता है। इसलिए मैंने पुस्तक में लिखा है कि 'विषय विष नहीं हैं, विषयों में निडरता विष है।'

यदि विषय विष होते तो भगवान महावीर तीर्थंकर ही नहीं हो पाते। भगवान महावीर को भी बेटी थी। अतः विषयों में निडरता विष है। अब मुझे कुछ बाधा नहीं करेगा, ऐसा सोचें वह विष है।

निडरता शब्द मैंने इसलिए दिया है कि विषय में डर रखें, विवशता हो तभी विषय में पड़ें। इसलिए विषय से डरिए, ऐसा कहते हैं, क्योंकि भगवान भी विषय से डरते थे। बड़े-बड़े ज्ञानी भी विषय से डरते थे। तब आप ऐसे कैसे हैं कि विषय से नहीं डरते? जैसे स्वादिष्ट भोजन आया हो, आमरस-रोटी वह सब मज़े से खाओ मगर डरकर खाओ। डरकर किस लिए कि अधिक खाओगे तो परेशानी होगी, इसलिए डरो।

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