आपसी संबंधों में एक-दूसरे पर होनेवाले क्रोध पर कैसे काबू पाएँ?

जीवन में किसी न किसी कारण से क्रोध हो जाता है। आपने कभी क्रोध के बारे में गंभीरता से सोचा है? क्रोध क्या है? क्रोध क्यों आता है और उसके परिणाम क्या हैं? आपसी संबंध में अक्सर एक-दूसरे पर क्रोध हो जाता है? क्रोध से कैसे छुटकारा पाएँ?

जो हमें सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं, उन्हीं के साथ हम अपने संबंध बिगाड़ देते हैं। हम अपने बच्चों को सहारा, सहूलियत और सुरक्षित वातावरण देना चाहते हैं, लेकिन हमारा गुस्सा ही बच्चों को डरा देता है।

क्रोधी स्वभाववाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए? जब मशीन ज़्यादा गरम हो जाएँ, तब थोड़ी देर के लिए उसे बंद कर देना चाहिए। तब वह ठंडी  हो जाएगी। लेकिन आप उससे कुछ छेड़छाड़ करोगे तो जल जाओगे।

रिश्तों में होनेवाली समस्याओं का हल पाने के लिए पढ़िए।

इसके अलावा, ज्ञानविधि में भाग लेकर अपने सच्चे आत्मस्वरूप को जानें। यह वास्तव में क्रोध से मुक्त बनने के लिए मदद करता है।

 

क्रोध

क्रोध करना यह हमारी कमजोरी है| सबकुछ हमारे हिसाब से हो यह अपेक्षा हम नहीं रख सकते क्योंकि कोई भी व्यक्ति हमारे काबू में नहीं हैं| क्रोध होने पर अंदर से उसका पछतावा करे और उसे बढ़ावा न दे|

Spiritual Quotes

  1. क्रोध निर्बलता है, इसलिए हो जाता है। भगवान ने इसलिए क्रोधी को 'अबला' कहा है। पुरुष तो कौन कहलाये? क्रोध-मान-माया-लोभ आदि निर्बलताएँ जिसमें नहीं होतीं।
  2. क्रोध एक कमजोरी है, मगर उसे बहादुरी समजते है। क्रोध करना वाले से क्रोध नहीं करने वाले का प्रभाव कुछ ज्यादा ही होता है।
  3. चिढ़ वह मूर्खता है, फूलिशनेस है। चिढ़ कमज़ोरी कहलाती है।
  4. क्रोध यानी खुद अपने घर को आग लगाना। खुद के घर में घास भरी हो और दियासलाई जलाना, उसका नाम क्रोध। अर्थात पहले खुद जले और बाद में पड़ौसी को जलाये।
  5. क्रोध यूँ ही स्वभाव से मनुष्य को नहीं आता है। यह तो उसेअपनी मनमानी करनी है।
  6. कोई हमारा नुकसान या अपमान करे तो वह हमारे ही कर्म का फल है, सामने वाला निमित्त है, एसी समाज फिट हो गई हो, तभी क्रोध जायेगा।
  7. क्रोध को बंद करने का उपाय खोजना मूर्खता है, क्योंकि क्रोध तो परिणाम है। जैसे आपने परीक्षा दी हो और रिज़ल्ट आया। अब मैं रिज़ल्ट को नष्ट करने का उपाय करूँ, उसके समान बात हुई। यह रिज़ल्ट आया वह किसका परिणाम है ? हमें उसमें बदलाव करने की आवश्यकता है।
  8. क्रोध-मान-माया-लोभ का उपाय यह है कि परिणाम को कुछ नहीं करें, उसके कारणों को उड़ा दें, तो वे सभी चले जायेंगे।
  9. जहाँ-जहाँ और जब क्रोध अत है, तब-तब नोट कर के उस पर जाग्रति रखें | और हमारे क्रोध कि वजह के जिसको दुःख हुआ हो, उसका प्रतिक्रमण करें, पछतावा करें और फिर नहीं करूँगा ऐसा दृढ निश्चय करें।
  10. जो क्रोधी है वह जानता नहीं, लोभी है वह जानता नहीं, मानी है वह जानता नहीं, जाननेवाला उससे अलग ही है।

 

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