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क्या वैवाहिक जीवन जीनेवालों के लिए आध्यात्मिक ज्ञान संभव है?

आपने सुना होगा कि मुक्ति पाने की अपनी गहरी इच्छा को पूरा करने के लिए, लोग अपने घर और परिवार को त्याग देते हैं, मंत्र का जाप करते हैं, तप करते हैं, साथ ही तपश्चर्या भी करते हैं; यह सभी आत्मा को मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए करते हैं।

जबकि दूसरी तरफ, सांसारिक जीवन में रहते हुए और विवाहित होते हुए भी कई महापुरुष जैसे श्रीमद राजचंद्र, भगवान कृष्ण, अर्जुन और भगवान राम को आत्म साक्षात्कार हुआ था।

आध्यात्मिक विज्ञान के साथ, विवाहित जीवन व्यतीत करते हुए भी आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना कैसे संभव है?

  • वही आध्यात्मिक विज्ञान जो भगवान रुषभदेवने भरत चक्रवती को दिया था । जिसकी मदद से भरत चक्रवती रानियों और इन्द्रिय सुखों के बावजूद मोक्ष प्राप्त करने में सक्षम थे।
  • यहाँ तक कि भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भी यही आध्यात्मिक दृष्टि दी थी। परिणामस्वरूप, महाभारत युद्ध में भाग लेने के बावजूद, अर्जुन उसी जीवन में मोक्ष प्राप्त करने में सक्षम हुए थे।
  • उनके अंतिम अवतार में, भगवान महावीर विवाहित थे और उनकी एक पुत्री थी। उन्होंने तीस वर्ष की आयु तक सांसारिक जीवन व्यतीत किया था और इसके बावजूद उन्होंने पूर्ण मोक्ष की प्राप्त हुई।

क्या आध्यात्मिक ज्ञान से उन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति संभव हुई और अंततः वे विवाहित जीवन जीते हुए भी मोक्षप्राप्ति हो गई?

हाँ! वास्तव में एक पत्नी, बच्चे, धन और इन्द्रिय सुख, मोक्ष प्राप्त करने में बाधक नहीं हैं, केवल आत्मा की अज्ञानता एक बाधक है।

हालाँकि, ये सभी महापुरुष एक अलग कालचक्र से थे, इस युग में, क्या सांसारिक जीवन के लिए त्याग और वैराग्य के बिना आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना संभव है?

आइए जानें ज्ञानीपुरुष परम पूज्य दादा भगवान के इस संक्षिप्त अंश आध्यात्मिक प्रवचन द्वारा:

प्रश्रकर्ता : लेकिन इस संसार में रहते हुए इस प्रकार आत्मज्ञान मिल सकता है?

दादाश्री : हाँ, ऐसा रास्ता है। संसार में रहकर। इतना ही नहीं, लेकिन वाइफ के साथ रहते हुए भी आत्मज्ञान मिल सके, ऐसा है। सिर्फ संसार में रहना ही नहीं, लेकिन बेटे-बेटियों की शादी करवाकर और सभी कार्य करते हुए भी आत्मज्ञान हो सकता है। आपके संसार में रहते हुए ही मैं यह करवा देता हूँ। संसार में, अर्थात सिनेमा देखने जाना वगैरह | आपको सभी छूट देता हूँ। बेटे-बेटियों की शादी करवाना और अच्छे कपड़े पहनकर करवाना। फिर इससे ज़्यादा और कोई गारन्टी चाहिए?

प्रश्रकर्ता : इतनी सारी छूट मिले, तब तो ज़रूर आत्मा में रहा जा सकता है।

दादाश्री : सारी छूट! यह अपवाद मार्र्ग है। आपको कुछ मेहनत नहीं करनी है। आपको आत्मा भी आपके हाथों में दे देंगे, उसके बाद आत्मा की रमणता में रहना और इस लिफ्ट में बैठे रहना। आपको और कुछ भी नहीं करना है। फिर आपको कर्म बंधेगे ही नहीं। एक ही जन्म के कर्म बंधेंगे, वे भी मेरी आज्ञा पालन के बदले ही। हमारी आज्ञा में रहना इसीलिए ज़रूरी है कि लिफ्ट में बैठते समय यदि हाथ इधर-उधर करेंगे तो मुश्किल में पड़ जाएँगे न!

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