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भगवान पद की प्राप्ति कैसे करें?

भूल बिना का दर्शन और भूलवाला वर्तन

खुद की भूल खुद को पता चले वह भगवान हो जाए।

प्रश्नकर्ता: इस तरह कोई भगवान हुआ था?

दादाश्री: जितने भी भगवान हुए, उन सभी को खुद की भूल खुद को पता चली थी और भूल को मिटाया था, वे ही भगवान हुए। भूल रहे नहीं उस तरह से वे भूल को मिटा देते हैं। सारी भूलें दिखती हैं, एक ऐसी भूल नहीं थी कि उन्हें नहीं दिखी हो। सूक्ष्म से सूक्ष्म, ऐसी सभी भूलें दिखती थीं। हमें भी हमारी पाँच-पचास भूलें तो हररोज़ दिखती हैं और वे भी सूक्ष्मतर और सूक्ष्मतम भूलें दिखती हैं, जो लोगों को नुकसानदायक बिलकुल भी नहीं होतीं। ये बोलते-बोलते किसीका अवर्णवाद बोला जाए, वह भी भूल कहलाती है। वह तो फिर स्थूल भूल कहलाती है।

अब भूल किसे दिखती है? तब कहे, भूल बिना का चारित्र, श्रद्धा में है खुद को! हाँ, और भूलवाला वर्तन, वर्तन में है, उसे भूल दिखती है। भूल बिना का चारित्र उसकी श्रद्धा में हो, भूल बिना का चारित्र संपूर्ण दर्शन में हो और भूलवाला वर्तन उसके वर्तन में हो, तो उसे हम मुक्त हुआ कहते हैं। भूलवाला वर्तन भले ही रहा, पर उसके दर्शन में क्या है?

एक सूक्ष्म से सूक्ष्म भूल रहितवाला चारित्र कैसा होना चाहिए? वह भीतर दर्शन में होना चाहिए। दर्शन में सूक्ष्म से सूक्ष्म भूल नहीं रहे, ऐसा दर्शन होना चाहिए। तभी भूल दिख जाती है न?! देखनेवाला क्लियर हो, तब ही देख सकता है। इसलिए हम कहते हैं न कि ३६० डिग्रीवाले जो भगवान हैं न, वे संपूर्ण क्लियर (चोखे) हैं और हमारा ‘अन्क्लिअरन्स’ दिखाते हैं। यह ज्ञान मिलने के बाद, सभी को ‘दो’ तो होते ही हैं। उन लोगों को भी ‘दो’ होते ही हैं। जिन्हें ज्ञान नहीं मिला उन्हें भी ‘दो’ होते है और इन्हें भी ‘दो’ होते हैं।

इस ज्ञान के बाद अंदर और बाहर देख सकते हैं। अंदर भूल बिना का चारित्र यह है, ऐसा वे दर्शन में देख सकते हैं। और भूल रहित चारित्र जितना उसके दर्शन में ऊँचा गया, उतनी ही, वे भूलें उसे दिखती हैं। भीतर जितना ट्रान्सपेरेन्ट (पारदर्शक) और क्लियर हुआ, दर्पण शुद्ध हुआ कि तुरन्त अंदर दिखता है। उसमें झलकती हैं भूलें! आपको भूलें झलकती हैं क्या, अंदर?

प्रश्नकर्ता: दिखती हैं। भूल रहित चारित्र जिसके दर्शन में हो और भूलवाला चारित्र जिसके वर्तन में हो, उससे दिखती हैं?

दादाश्री: उससे तुरन्त पता चलता है कि दर्शन भूल बिना का है। इसलिए, भूल बिना का चारित्र जिसे दर्शन में होता है, वह कह देता है कि यह भूल हुई।

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