
सीमंधर स्वामी ब्रह्मांड में हैं। वे आज अरिहंत हैं, इसलिए उन्हें नमस्कार करो। अभी वे हाज़िर हैं। अरिहंत के रूप में हैं, इसीलिए हमें फल मिलता है। अतः पूरे ब्रह्मांड में अरिहंत जहाँ कहीं भी हों उन्हें नमस्कार करता हूँ ऐसा समझकर बोलने से उसका फल बहुत अच्छा मिलता है।
जब हम नमो अरिहंताणं बोलते हैं तो वह किसे पहुँचता है, इस बारे में परम पूज्य दादा भगवान कहते हैं:
“यह ‘नमो अरिहंताणं’ जो हम बोलते हैं वह किसे पहुँचता है? अन्य क्षेत्रों में जहाँ-जहाँ अरिहंत हैं उन्हें पहुँचता है। महावीर भगवान को नहीं पहुँचता। डाक तो हमेशा उसके पते पर ही पहुँचेगी। जबकि लोग क्या समझते हैं कि यह ‘नमो अरिहंताणं’ बोलकर हम महावीर भगवान को नमस्कार पहुँचाते हैं। वे चौबीस तीर्थंकर तो मोक्ष में जाकर बैठे हैं, वे तो ‘नमो सिद्धाणं’ हो चुके हैं। वे भूतकालीन तीर्थंकर कहलाते हैं। यानी कि आज सिद्ध भगवान कहलाते हैं और जो वर्तमान तीर्थंकर हैं, उन्हें अरिहंत कहा जाता है।“
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Q. "जय सच्चिदानंद" का अर्थ क्या है?
A. यह त्रिमंत्र है उसमें पहले जैनों का मंत्र है, बाद में वासुदेव का और शिव का मंत्र है। और यानी... Read More
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