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"ॐ" क्या है?

प्रश्नकर्ता : फिर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' समझाइए।

दादाश्री : वासुदेव भगवान! अर्थात् जो वासुदेव भगवान नर में से नारायण बने, उन्हें मैं नमस्कार करता हूँ। जब नारायण हो जाते हैं, तब वासुदेव कहलाते हैं।

प्रश्नकर्ता : श्रीकृष्ण, महावीर स्वामी वे सभी क्या हैं?

दादाश्री : वे सभी तो भगवान हैं। वे देहधारी रूप में भगवान कहलाते हैं। वे भगवान क्यों कहलाते हैं कि भीतर संपूर्ण भगवान प्रकट हुए हैं। इसलिए हम उन्हें देह सहित भगवान कहते हैं।

और जो महावीर भगवान हुए, ऋषभदेव भगवान हुए वे पूर्ण भगवान कहलाते हैं। कृष्ण भगवान तो वासुदेव भगवान कहलाते हैं, उसमें कोई शक नहीं है न? वासुदेव यानी नारायण। नर में से जो नारायण हुए ऐसे भगवान प्रकट हुए थे। उन्हें हम भगवान कहते हैं।

वासुदेव की गिनती भगवान में होती है। शिव की गिनती भगवान में होती है और सच्चिदानंद, वे भी भगवान में गिने जाते हैं। और ये पाँचों परमेष्टि भी भगवान में ही गिने जाते हैं। क्योंकि ये सच्चे साधक होते हैं ये सब भगवान में गिने जाते हैं। लेकिन ये पंच परमेष्टि कार्य-भगवान कहलाते हैं, जब कि वासुदेव तथा शिव कारण-भगवान कहलाते हैं। वे कार्य-भगवान होने के कारणों का सेवन करते हैं।

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