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"जय सच्चिदानंद" का अर्थ क्या है?

यह त्रिमंत्र है उसमें पहले जैनों का मंत्र है, बाद में वासुदेव का और शिव का मंत्र है। और यानी सच्चिदानंद में तो हिन्दू, मुस्लिम, विदेशी इन सभी लोगों के मंत्र आ गए ।

इन सभी मंत्रों को साथ बोलें, ये मंत्र निष्पक्षपात रूप से बोलें तब भगवान हम पर खुश होते हैं। एक व्यक्ति का पक्ष लें कि, 'ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय' सिर्फ यही बोला करें तो वे सभी खुश नहीं होंगे। इससे तो सभी देव खुश हो जाते हैं।

जो मत में पड़े हुए हों यह उनका काम नहीं है। मत में से बाहर निकलेंगे, तब काम का है।

कैसे-कैसे लोग हिन्दुस्तान में हैं, अभी भी! पूरा हिन्दुस्तान खत्म नहीं हो गया। यह हिन्दुस्तान पूरा खत्म नहीं हो सकता। यह तो मूलतः आर्यों की भूमि है। और जिस भूमि पर तीर्थंकरों का जन्म हुआ! सिर्फ तीर्थंकर ही नहीं, तिरसठ शलाका पुरुष जिस देश में जन्म लेते हैं, वह देश है यह!

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