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पत्नी के साथ हर रोज़ होनेवाले टकराव में कैसे एडजस्टमेन्ट लें?

प्रश्नकर्ता : मैं वाइफ के साथ एडजस्ट होने की बहुत कोशिश करता हूँ, लेकिन एडजस्टमेन्ट नहीं हो पाता।

दादाश्री : यह सब हिसाब के अनुसार है! टेढ़ा बोल्ट और टेढ़ा नट, वहाँ चाकी सीधी घुमाने से कैसे काम चलेगा? आपको ऐसा होता होगा कि यह स्त्री जाति ऐसी क्यों है? लेकिन स्त्री जाति तो आपका 'काउन्टर वेट' है। जितना आपका दोष, उतनी वह टेढ़ी; इसीलिए तो सब 'व्यवस्थित' है, ऐसा हमने कहा है न?

प्रश्नकर्ता : सभी हमें सीधा करने आए हैं, ऐसा लगता है।

दादाश्री : वह तो आपको सीधा करना ही चाहिए। सीधे हुए बगैर दुनिया चलती नहीं न? सीधा नहीं होगा तो फिर बाप कैसे बनेगा? सीधा होगा तभी बाप बनेगा। स्त्री जाति कुछ ऐसी है कि वह नहीं बदलेगी, इसलिए हमें बदलना होगा। वह सहज जाति है, वह बदल जाए ऐसी नहीं है।

वाइफ, वह क्या चीज़ है?

प्रश्नकर्ता : आप बताइए।

दादाश्री : वाइफ इज़ द काउन्टर वेट ऑफ मेन। वह काउन्टर वेट यदि नहीं होगा तो मनुष्य लुढ़क जाएगा।

प्रश्नकर्ता : यह समझ में नहीं आया।

दादाश्री : इंजन में काउन्टर वेट रखा जाता है, वर्ना इंजन चलते चलते लुढ़क जाएगा। इसी तरह मनुष्य का काउन्टर वेट स्त्री है। स्त्री होगी तो लुढ़केगा नहीं। वर्ना दौड़-धूप करके भी कोई ठिकाना नहीं रहता, आज यहाँ तो कल कहाँ से कहाँ निकल गया होता। यह स्त्री है इसलिए वह वापस घर आता है, वर्ना वह घर आता क्या?

प्रश्नकर्ता : नहीं आता।

दादाश्री : स्त्री काउन्टर वेट है उसका।

टकराव, आखिर में अंतवाले

प्रश्नकर्ता : दोपहर को सुबहवाला टकराव भूल जाते हैं और शाम को फिर नया होता है।

दादाश्री : हम यह जानते हैं, कि टकराव किस शक्ति से होते हैं। वह उल्टा बोलती है, उसमें कौन सी शक्ति काम कर रही है? बोलने के बाद फिर 'एडजस्ट' हो जाते हैं, वह सब ज्ञान से समझ में आए, ऐसा है। फिर भी संसार में 'एडजस्ट' होना है। क्योंकि प्रत्येक चीज़ अंतवाली होती है। और मान लो वह चीज़ लंबे अरसे तक चले फिर भी आप उसे 'हेल्प' नहीं करते, बल्कि ज़्यादा नुकसान पहुँचाते हो। आप अपना खुद का और सामनेवाले का भी नुकसान कर रहे हो।

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