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प्रतिक्रमण क्या है?

दादाश्री : प्रतिक्रमण का अर्थ क्या यह आप जानते हैं?

प्रश्नकर्ता : नहीं।

दादाश्री : आप जैसा जानते है वैसा बताइये।

प्रश्नकर्ता : पाप से वापस लौटना।

दादाश्री : पाप से वापस लौटना। भगवान ने कैसा सुंदर न्याय किया है कि पाप से वापस लौटना उसका नाम प्रतिक्रमण। पर अभी भी पाप तो खड़े हैं, इसका क्या कारण?

प्रश्नकर्ता : वह तो आप ही समझाइये। आलोचना, प्रतिक्रमण और प्रत्याख्यान, ये तीन शब्द अभी मुझे पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं होते हैं।

दादाश्री : प्रत्याख्यान यानी में आज इस वस्तु को छोड़ देता हूँ, त्याग करता हूँ, ऐसा उसका भावार्थ है। वस्तु को छोड़ देना हो तो प्रत्याख्यान करता हूँ।

प्रश्नकर्ता : पछतावा करता हूँ वह प्रतिक्रमण और तय करें कि इसके अनुसार नहीं करूँगा वह प्रत्याख्यान?

दादाश्री : हाँ, पछतावा वह प्रतिक्रमण कहलाये। अब प्रतिक्रमण करने के बाद फिर से ऐसा अतिक्रमण नहीं हो, इसलिए 'अब फिर से ऐसा नहीं करूँगा', ऐसा कहना उसका नाम प्रत्याख्यान। फिर से नहीं करूँगा, इसके लिए प्रोमिस करता हूँ, ऐसा मन में तय करना और यदि फिर से ऐसा हो गया तो एक परत तो गई, फिर दूसरी परत आयेगी तो उसमें घबराना नहीं। हर बार यही करते रहना।

प्रश्नकर्ता : मन में मा़फी माँग लेना।

दादाश्री : हाँ, मा़फी माँग लेना।

हमें कोई गाली दे और असर हो तो अपनी ही भूल है, ऐसा खुद को लगता रहे और खुद उसके प्रतिक्रमण किया करे तो वह भगवान का सब से बड़ा ज्ञान है। यही ज्ञान मोक्ष में ले जाये। इतना शब्द, हमारे एक ही वाक्य (वचन) का यदि पालन करें न तो मोक्ष में चला जाये। 

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