प्रश्नकर्ता: प्रतिक्रमण विधि क्या है ?

दादाश्री: उदाहरण के तौर पर अगर आप से किसी चंदूलाल को दुःख हो गया तो आपको 'चंदूलाल' के मन-वचन-काया के योग भावकर्म, द्वव्यकर्म, नो कर्म से भिन्न ऐसे 'शुद्धात्मा भगवान' को याद करके कहना है, "हे शुद्धात्मा भगवान मैंने कठोर शब्द बोले, वह मेरी भूल है, जिसके लिए मैं माफी माँगता हूँ। मुझे माफ करो और मैं निश्चय करता हूँ कि ऐसा फिर कभी नहीं करूँगा। ऐसी भूल मुझसे फिर कभी नहीं हो उसके लिए मुझे शक्ति दो, शक्ति दो, शक्ति दो"
जब आप प्रतिक्रमण करें, तब दादा भगवान या शुद्धात्मा भगवान को याद करके करें। सबसे पहले अपने भूल की आलोचना करें अर्थात अपनी भूल को स्वीकार करें। फिर प्रतिक्रमण अर्थात अपनी भूल की माफी माँगिए ताकि वह भूल धूल जाएगी। और अंत में प्रत्याख्यान कीजिए। प्रत्याख्यान अर्थात वह भूल मैं दुबारा नहीं करूँगा ऐसा निश्चय।
* चंदूलाल = जब भी दादाश्री 'चंदूलाल' या फिर किसी व्यक्ति के नाम का प्रयोग करते हैं, तब वाचक, यथार्थ समझ के लिए, अपने नाम को वहाँ पर डाल दें।
सामनेवाले की शुद्धात्मा को हाज़िर करके उसे फोन लगाना कि ‘यह भूल हुई, क्षमा करें।’
और दूसरा, घर के लोगों के भी रोज़ाना प्रतिक्रमण करने चाहिए। आपके माता-पिता, भाई-बहनें सभी का रोज़ाना प्रतिक्रमण करना पड़ेगा। सारे कुटुंबिजनों का, क्योंकि उसके साथ बहुत चिकणी फाइल (गाढ़ ऋणानुबंधवाले व्यक्ति) होगी।
यदि प्रतिक्रमण करोगे न, यदि एक घंटा कुटुंबिजनों के लिए प्रतिक्रमण करोगे न, अपने परिवारवालों को याद करके, नज़दीक से लेकर दूर-दूर के सभी, भाईयों, उनकी पत्नियाँ, चाचा, चाचाओं के बच्चे वगैरह वे, जो एक फैमिली (परिवार) हों न, तो दो-तीन-चार पीढि़यों तक के, उन सभी को याद करके, प्रत्येक के लिए एक-एक घंटा प्रतिक्रमण होगा न, तो भयंकर पाप भस्मीभूत हो जाएँगे। और आपकी ओर से उन लोगों के मन साफ हो जाएँगे। इसलिए आपके सभी नज़दीकी, लोगों सभी को याद कर-करके प्रतिक्रमण करने चाहिए। और जब रात नींद नहीं आए उस घड़ी यह सेट किया कि चल पड़ा। ऐसी सेटिंग नहीं करते? ऐसी यह व्यवस्था, वह फिल्म शुरू हुई तो उस घड़ी बड़ा आनंद आएगा। वह आनंद समाएगा नहीं! क्योंकि जब प्रतिक्रमण करते हैं न, तब आत्मा का पूर्णरूप से शुद्ध उपयोग रहता है। बीच में किसी का द़खल नहीं होता।
क्योंकि जब प्रतिक्रमण करतें हैं न, तब आत्मा का पूर्णरूप से शुद्ध उपयोग रहता है, इसलिए बीच में किसी का द़खल नहीं होता।
आप अपने प्रतिक्रमण, विधि करके शूरु कर सकते हैं।
प्रश्नकर्ता : प्रतिक्रमण की विधि क्या है?
दादाश्री : उदाहरण के तौर पर अगर आप से किसी चंदूलाल को दुःख हो गया तो आपको 'चंदूलाल' के मन-वचन-काया के योग भावकर्म, द्वव्यकर्म, नो कर्म से भिन्न ऐसे 'शुद्धात्मा भगवान' को याद करके कहना है।
मन-वचन-काया का योग, भावकर्म-द्रव्यकर्म-नोकर्म, चन्दुलाल और चन्दुलाल के नाम की सर्व माया से भिन्न ऐसे 'शुद्धात्मा' को याद करके कहना, 'हे शुद्धात्मा भगवन्, मेरे से ऊँची आवाज में बोला गया वह भूल हुई। अतः उसकी मा़फी माँगता हूँ। और वह भूल अब फिर से नहीं करूंगा ऐसा निश्चय करता हूँ। ऐसी भूल नहीं करने की शक्ति दीजिए।' शुद्धात्मा को याद किया अथवा 'दादा' को याद किया और कहा कि, 'यह भूल हो गई' अर्थात् वह आलोचना, उस भूल को धो डालना वह प्रतिक्रमण और ऐसी भूल दोबारा नहीं करूँगा ऐसा निश्चय करना वह प्रत्याख्यान है।
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