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मैंने गलती की है। अब मुझे जीना नहीं है। मैं अपने आप को मार डालना चाहता हूँ।


हम सभी को गलतियाँ करना अच्छा नहीं लगता, लेकिन कभी-कभी गलतियाँ हो जाती हैं। इनमें से कुछ गलतियाँ तो छोटी होती हैं, लेकिन कुछ गलतियाँ जीवन बदल दें ऐसी होती हैं। खासकर ऐसी गलतियों के लिए यह जानकर ही डर लगता है कि, मैंने बड़ी गलती कर दी है। जो हमें बहुत दुःखी और शर्मिंदिगी महसूस करवाती है, खुद को गुनहगार मानते हैं और खुद पर चिढ़ जाते हैं। इतनी हद तक कि, हमें लगने  लगता है कि, ‘मुझे अब जीना नहीं है! मैं आत्महत्या करना चाहता हूँ।‘

यदि हमें ऐसे विचार आ रहे हों तो सही सलाह यह है, कि हम ध्यान रखें कि किस तरह से ऐसे विचारों को रोक सकते हैं। चाहे कितनी भी बड़ी गलती क्यों न हो, वो आत्महत्या करने का कोई कारण नहीं है। आइए, हम परिस्थिति को समझने का प्रयत्न करें और हर दृष्टिकोण से देखें। ऐसी भावनाओं में रहने के बजाय, सही कदम यह है कि भूल करने के बाद उसे सुधारने के लिए कुछ प्रयत्न करें।

  • जो भी गलती हुई है, उसे स्वीकार कर लें और उसे सुधारने का प्रयत्न करें। यदि हम उसे सुधार नहीं सकते, तो उसे स्वीकार कर लें और पूरे तालमेल के साथ समाधान लाने का जितना हो सके उतना प्रयत्न करें।
  • गलती से सीख प्राप्त करें। हमने क्या गलत किया उसमें उलझकर न रह जाएँ, उससे सीखने का प्रयत्न करें। यदि हम सीख नहीं सकते, तो हो सके तो उस अनुभव को दूसरों के साथ शेयर करें, ताकि वैसी गलती वह व्यक्ति भी न करे।
  • अतीत को याद न करें और यह सोचना भी बंद करें कि, “मैंने गलती की है”, वर्तमान में ही रहें। अतीत को याद करेंगे तो दुःखी ही होंगे। भविष्य में क्या होगा यह सोचेंगे, तो चिंता बढ़ेगी। लेकिन वर्तमान में रहकर समाधान लाने का प्रयत्न करेंगे तो एक आशा रहेगी। भविष्य में “क्या होगा” इन विचारों में अटक न जाएँ। इसके बजाय, उसे सुधारने में ध्यान दें।
  • यदि संभव हो तो जिसे हमने दुःख पहुँचाया है, उस व्यक्ति को यह बताएँ कि हमें भी उस बात का खेद है और उन्हें समझाने का प्रयत्न करें कि, वास्तव में हमारा उद्देश्य ऐसा नहीं था। यदि हम सामने जाकर माफी नहीं मांग सकते, तो फिर उनके भीतर बैठे हुए भगवान से मन ही मन में माफी माँग लें।
  • अपनी गलती स्वीकारेंगे, तो लोगों की तरफ़ से माफी जल्दी मिल जाएगी। हो सकता है कि, शायद वे तुरंत माफ करने के लिए तैयार न हों। हमने जो भी कहा है या किया है, उसे सामने वाले व्यक्ति को समझने और स्वीकारने में समय लगेगा। इसलिए धैर्य रखें और अपनी अपेक्षाओं को इस तरह से संभाल लें।
  • इतना समझ लें कि, गलती हो सकती है, लेकिन महत्त्वपूर्ण यह है कि हम उसके लिए क्या कदम उठाते हैं।
  • बातों को अधिक न उलझाएँ, सरल रखें।
  • शांत रहें और स्पष्ट रूप से सोचें।
  • हम ऐसा दृढ़ता से निश्चय करें कि, फिर ऐसी गलती कभी नहीं करेंगे।
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