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जब जीवनसाथी से धोखा मिल रहा हो, तो चिंता और संदेह से कैसे छुटकारा पाये ?

जब आपको पता चलता है कि आपका जीवनसाथी आपको धोखा दे रहा है, तब ऐसी स्तिथि में शंकित और चिंतित हो जाना आम बात है ।"यह संभावना है कि मेरा जीवनसाथी मुझे धोखा दे रहा है" सबसे पहले संदेह होता है और यदि आप इस संदेह को बिना किसी सबूत के पनाह देते  हैं, तो यह निश्चित रूप से आपके रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म कर देगा । इसी लिए यहाँ महत्वपूर्ण चाबी यह है की इस संदेह से हम किसी प्रभावी तरीके से मुक्त हो जाए । संदेह सूक्ष्म है, जिसका सकल रूप आपके मन में अपने साथी के बारे में उठने वाले निम्नलिखित प्रश्न में स्पष्ट हो जाते है:

  • वह क्या कर रहे/रही होंगे/होगी ?
  • उन्हें/उसे देर क्यों हुई ?
  • वह किस्से बात कर रहे/रही हे?
  • वह किसे मेसेज कर रहे/रही हैं ?
  • जब मैने उन्हें/उसे फ़ोन किया, तो उन्होंने/उसने मेरे फ़ोन का जवाब क्यों नहीं दिया? 

इन सवालों के उठने पर आपको कैसा महसूस होता है? क्या यह आपको महसूस कराते हैं कि मेरी पत्नी मुझे धोखा दे रही है या मेरे पति मुझे धोखा दे रहे हैं? क्या आप बेचैनी और घबराहट महसूस करते हैं? क्या यह आपको अपने रिश्ते की बुनियाद पर सवाल खड़ा कराते हैं?

वास्तव में, आपके पति या पत्नी आपसे धोखा कर रहे हैं, इस संदेह को पनाह देना यानि उस नींव में दरार पैदा करना है जिस पर आपका रिश्ता बना है । और यदि आप इन विचारों को, एक पल के लिए भी स्थान देते है तो आप इनमें ऐसे फसेंगे की फिर उनसे प्रभावित हुवे बिना बाहर निकलने की संभावना नहीं के बराबर हो जाएगी । यही कारण है कि जब तक संभव हो तो ऐसे विचारों से दुर ही रहे ।

तो इस तरह के विचारों पर काबू पाना, अपना दिमाग शांत रखना और बेवफाई पर काबू पाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

सबसे पहले, इस तरह के विचारों को मन में आने न दें । कहते हैं न  ‘निवारण इलाज से बेहतर है ।' यदि आप किसी रिश्ते में हैं, तो आपको अपने साथी पर संदेह न करके उन पर भरोसा करना होगा । आखिरकार, ‘विश्वास हर रिश्ते की नींव है ।‘

आइए हम गहराई से एक नज़र संदेह और किस प्रकार वह उत्पन्न होता हैं इसपर डालें, ताकि आप समझ सकें कि उत्पन्न होने से पहले ही इसका निरावरण कैसे करे : 

1) संदेह कैसे पैदा होता है?

जहाँ अत्यधिक लगाव होता है, वहाँ अत्यधिक संदेह पैदा होता है । और फिर संदेह का यह कीड़ा आपको अंदर से घेर लेता है । जब दूसरी व्यक्ति की बातचीत या आचरण, आपकी अपेक्षा से थोड़ा सा भी भिन्न होता है, तब संदेह के विचार उत्पन्न होने लगता हैं । जब हमारा मन इस अनुरूप को समज नहीं पाता, तो हमें संदेह होने लगता है । "ऐसा क्यों है ?," क्या मेरा जीवनसाथी मुझे धोखा दे रहा है? "

यदि आपका साथी देर से घर आता है, तो उसे समझाएँ और उसको आप ऐसा क्यों सोचते हैं कारण बताएँ, लेकिन संदेह न करें । संदेह समस्या को पोषण देता है । हाँ, आप उन्हें सावधान किजिए, पर संदेह नहीं करें । 

2) जब आप शंकित होते हैं, तो क्या होता है? इसके प्रभाव क्या हैं?

  • जब आप संदेह करने लगते हैं, तो आप सभी कुछ निरीक्षण और जांच करने में प्रवृत्त हो जाते हैं । आप सभी बातों में सामान्य से ज्यादा पड़ना शुरू कर देते हैं । इससे संदेह और भी अधिक बढ़ता जाता है । आप रात को सो नहीं पाते, खाने का मन नहीं करता और किसी भी कार्य में आपको शांति नहीं मिलती । ये विचार आपको घेरे रहते है और आप व्याकुल हो जाते हैं ।
  • जिस क्षण अपने जीवनसाथी के धोखे को लेकर संदेह होता है, उसी क्षण अपने साथी से भेद खड़ा हो जाता है । किसी एक व्यक्ति के संदेह का कंपन दूसरे व्यक्ति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है ।
  • संदेह सामने वाली व्यक्ति की गलती ही दिखता है । एक बार संदेह हो तो इसका कोई अंत ही नहीं है क्योंकि इसका कोई निर्णय ही नहीं आता है । परिणाम से व्यक्ति की आंतरिक दु:ख भी जारी रहती है ।
  • वास्तविकता में संदेह सभी दु:खों का मूल कारण है । संदेह दु:ख के सिवाय कुछ नहीं है । अधिक संदेह करने लगे, तब इसका दु:ख मृत्यु के समान बनजाता है ।

संदेह और भय कौज़ और इफेक्ट जैसे है । संदेह का बिज पूरा जंगल खड़ा कर देता है । संदेह के विचार को जरा देर के लिए स्थान दो, तो वह सामने वाले व्यक्ति तक पहोंच कर बढ़ जाते हैं । इसलिए पैदा होते ही इन्हें खत्म करना अच्छा है ।

3) संदेह को कैसे खत्म करें?

  • समज से काम लेते हुए, आपको संदेह से विरुद्ध थोडी थोडी समज बिठाते रहनी होगी, लेकिन यह एक दिन में नहीं जायगा । अच्छा होगा आप इन्हें उत्पन्न ही न होने दें । क्योंकि वास्तव में निवारण इलाज से बेहतर है । जिस क्षण पैदा हो उसी क्षण संदेह को खत्म कर देना और उन्हें बढ़ने न दे अन्यथा वे आपको शांति से रहने नहीं देंगे ।
  • अगर आपको देखते ही संदेह होता है, तो मान लें कि आपने कुछ भी नहीं देखा है और साबित न हो तब तक सामने वाले व्यक्ति के लिए संदेह न करे । यदि यह संभव नहीं है, तो अपने साथी के साथ बैठें और उनसे आपने जो देखा उसके बारे में बात करें और पूछें कि वास्तव में क्या हो रहा है । अगर वे स्पष्टीकरण देते है , तो उसे आप स्वीकार करके उस घटना के साथ साथ अपने संदेह को पीछे छोड़ दे ।

4) यदि मैंने अपने साथी के अनुचित आचरण को देखा है तो?

क्या आपको संदेह है, क्योंकि आपने कुछ देखा है? और अगर ऐसा है, तो क्या यही चीज़ आपके देखने से पहले नहीं चल रही होगी? लोग चोरी करते हुए पकडे जाने वाले व्यक्ति को चोर कहते है । लेकिन जो पकड़े नहीं जाते वे भीतर के चोर होते हैं, हैं न? जो कभी-कभार चोरी करते हैं वे पकड़े जाते हैं । क्योंकि वे पकड़े जाते हैं, लोग उन्हें चोर कहते हैं । लेकिन असली चोर वह है, जो पकड़ा नहीं गया, लेकिन यह दुनिया ऐसी ही है ।

अगर आप अपने पार्टनर को ऐसी स्थिति में पाते है जो आपके लिए समझौते की स्थिति तब आप तुरंत प्रतिक्रिया न दें । एक कदम पीछे हटकर, खुद को इससे बहार निकाले । जो आपने देखा उसके लिए अपने आप को सोचने का समय दें, इससे पहले की आप कुछ ऐसा करे जिससे अधिक नुकसान कर बेठे ।

आपको यह मुश्किल लग सकता है, लेकिन आपको राहत मिलेगी । संदेह को पीछे छोडकर आगे बढ़े और शांती से अपने जीवनसाथी से बात करे कि आगे क्या करना है । क्या उन्हें अपने किए पर पछतावा है? या अब इस समजोते से भरे संबंध को खत्म करने का समय आ गया है? यदि आप उन्हें दूसरा मौका देते हैं, तो आपको सभी संदेह भुलाने होंगे, अन्यथा वे अधिक नुकसान करेंगे । अगर आप इस समजोते से भरे रिश्ते को खत्म करने का निर्णय लेते है तो आप को इसे सुखद और मैत्रीपूर्ण तरह से करे । क्योंकि आपके साथी ने आपको धोखा दिया है इस बात पर क्रोधित और परेशान होना, आपके दर्द को बढ़ाएगा जो अंतहीन होगा ।

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