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दान और धर्मादा

पुण्य कमाने के अनेक मार्गों का धर्म के शास्त्रों में और धर्मगुरुओं ने बताए हैं। उनमें से एक मार्ग है, दान!

दान देने की प्रथा तो मनुष्य के जीवन में बचपन से अपनाई जाती है। बच्चा छोटा हो, तभी से माता-पिता उसे मंदिर या धर्मस्थलों में ले जाएँ तो बाहर गरीब लोगों को पैसे दिलवाते हैं, खाना दिलवाते है, मंदिर या धर्मस्थलों में दान की पेटी में पैसे डलवाते हैं। इस प्रकार बचपन से ही मनुष्य को दान के संस्कार मिलते ही रहते हैं।

दान का महत्व क्या है? सच्चा दान कैसा होता है? दान देते समय कैसे भाव रखने चाहिए? दान किस-किस प्रकार से हो सकता है? सबसे ऊँचा दान कौन-सा है? दान किसे और कितना देना चाहिए? वगैरह अनेक दान से संबंधित समझ परम पूज्य दादाश्री की ज्ञानवाणी द्वारा बही है। दान देते समय यदि अंदर की अजागृति हो तो देकर भी कैसे खोट खाते हैं, उसका सूक्ष्म निरूपण उन्होंने किया है। इस समझ को संक्षिप्त रूप में उदाहरण के साथ यहाँ दर्शाया गया है, जो वाचक को दान देने में मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

लक्ष्मी के सद्उपयोग

पैसे लोगों के लिए महत्वपूर्ण है पर वह सर्वस्व नहीं है| हमें धन का उपयोग किसी अच्छे और महान कार्य के लिए करना चाहिए| धन जो दूसरों की मदद के लिए उपयोग किया जाता है वह अधिक गुना वापस मिलता है|

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Top Questions & Answers

  1. Q. दान अर्थात् क्या? उसका महत्त्व क्या है?

    A. दान यानी औरों को अपना खुद का कुछ भी देकर उन्हें सुख देना वह। किसी भी दूसरे जीव को, चाहे वो मनुष्य... Read More

  2. Q. दान के प्रकार कौन-कौन से हैं?

    A. दान मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं। एक आहारदान, दूसरा औषधदान, तीसरा ज्ञानदान और चौथा अभयदान। १)... Read More

  3. Q. दान किस तरह से देना चाहिए?

    A. यदि हमारे पास अतिरिक्त धन हो और हम उसे दान में देते है, तब भीतर कैसा भाव होना चाहिए, इसकी सुंदर... Read More

  4. Q. दान कहाँ और कितना देना चाहिए?

    A. इस काल में दान बहुत सोच-समझकर देने जैसा है। पहले के ज़माने में सच्चा धन आता था, इसलिए दान भी... Read More

Spiritual Quotes

  1. दान यानी क्या कि देकर लो। यह जगत् प्रतिघोष स्वरूप है। इसलिए जो आप करो वैसा प्रतिघोष सुनने को मिलेगा, उसके ब्याज के साथ।
  2. हम शुभ करें, दान दें, वह दान कैसा? जागृतिपूर्वक का कि लोगों का कल्याण हो।
  3. दान भी गुप्त रूप से ।
  4. सरप्लस का ही दान ।
  5. जो कमाता है, उसका धन नहीं। जो खर्चे उसका धन। इसलिए नये ओवरड्राफ्ट भेजे वे आपके। नहीं भेजे तो आप जानो।
  6. दान यानी अन्य किसी भी जीव को सुख पहुँचाना। मनुष्य हो या अन्य प्राणी हो, उन्हें सुख पहुँचाना, वह दान कहलाता है। और सब को सुख पहुँचाया तो उसके ‘रिएक्शन’ में हमें सुख ही मिलेगा। सुख पहुँचाया तो तुरंत ही घर बैठे आपको सुख ही मिलेगा!

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