
संसार में जो दु:ख आते हैं वे अपने द्वारा धर्म की विराधना होने से आते हैं।
परम पूज्य दादा भगवान(1) धर्माधर्म आत्मा - अधर्म को धक्का लगाना और धर्म का संग्रह करना, उससे सांसारिक फल मिलता है। (2) ज्ञानघन आत्मा - यानी कि ‘रियल और रिलेटिव’ का ज्ञान हो। (3) विज्ञानघन आत्मा - यानी कि ‘एब्सल्यूट’ (केवल)। हम ‘विज्ञानघन आत्मा’ में बैठे हुए हैं।
परम पूज्य दादा भगवानअपने दृष्टि दोष को जो कम करे, वही धर्म है। जो दृष्टि दोष को बढ़ाए, वह अधर्म है। यह संसार दृष्टि दोष का ही परिणाम है।
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