
खुद की भूल खत्म होगी तब काम होगा। वर्ना यदि ‘ज्ञानी पुरुष’ आपको तार लेंगे तो काम हो जाएगा। यह तो, जो खुद तर चुके हैं और अनेक लोगों को तारने में समर्थ हैं, ऐसे ज्ञानी पुरुष का ही काम है।
परम पूज्य दादा भगवानटकराव ही अपनी अज्ञानता है। सही-गलत भगवान के वहाँ है ही नहीं। भगवान के वहाँ द्वंद है ही नहीं।
परम पूज्य दादा भगवानरहस्य ज्ञान का जगत् को पता ही नहीं है। जिससे भटकते रहना पड़े उस अज्ञान-ज्ञान का सभी को पता है। जेब कट जाए, उसमें भूल किसकी? इसकी जेब नहीं कटी और तेरी ही क्यों कटी? तुम दोनों में से अभी भुगत कौन रहा है? ‘भुगते उसकी भूल!’
परम पूज्य दादा भगवानअज्ञान निकालने के लिए क्या करना चाहिए? ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। ज्ञान प्राप्त करने के लिए पुस्तक या शास्त्रों के साधनों का सेवन करना चाहिए, और यदि ‘ज्ञानी पुरुष’ मिल जाएँ तो अन्य किसी भी साधन की ज़रूरत नहीं है। आत्मा अवक्तव्य, अवर्णनीय है। वह पुस्तकों में नहीं लाया जा सकता।
परम पूज्य दादा भगवानआत्मा का अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन और अनंत शक्ति आज भी उसी रूप में है। आत्मा कभी भी पापी हुआ ही नहीं। आत्मा संपूर्ण शुद्ध ही है।
परम पूज्य दादा भगवान‘आत्मा ऐसा है, वैसा है, ऐसा नहीं है’, ऐसा तो सब शास्त्र भी कहते हैं, साधु-महाराज भी कहते हैं। लेकिन मीठा का मतलब क्या है? वह ज्ञान तो सिर्फ ‘ज्ञानी’ ही चखाते हैं। उसके बाद वह ज्ञान क्रियाकारी हो जाता है।
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