
बाहर का झगड़ा एकावतारी है जबकि अंदर का झगड़ा सौ-सौ जन्मों, लाख-लाख जन्मों तक चलता रहता है!
परम पूज्य दादा भगवानपूरे दिन कड़वे या मीठे फल भुगतते ही रहते हैं। भुगतने के लिए ही तो यह जन्म मिला है!
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