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क्या मुझे भविष्य की चिंता करनी चाहिए ?

क्या आप भविष्य के बारे में चिंतित हैं? हम उन परिस्थितियों की कल्पना करके भविष्य की चिंता करते है, जो हमे अप्रिय हैं। वह स्थिति हो भी सकती हैं, और नहीं भी। चीजों कि नकारात्मक कल्पना करके हम सब कुछ बर्बाद कर देते हैं। क्या आप इन सभी के बारे में आश्चर्य हो? 

  • क्या कोई कल है?
  • क्या कल के लिए चिंता करने, या योजना बनाने की आवश्यकता हैं?
  • मुझे किस हद तक तैयारी करनी चाहिए?
  • हम कल को ध्यान में रखकर आज काम करते हैं, तो क्या मुझे कल के लिए कुछ भी नही करना चाहिए?
  • क्या मेरी सभी ज़रुरते पूरी होंगी?

आइये हम इन सवालो के जवाब तलाश करें, जिससे हम समज सके कि भविष्य के बारे में चिंता करना कैसे बंद करें।

क्या कोई कल हैं?

हममें से कई लोग कल की चिंता करते हैं कि कल क्या होगा। लेकिन हम ये भूल जाते है कि वास्तव में इस दुनिया में किसी ने कल नहीं देखा है। जब भी आप देखे, आपको आज ही दिखेगा। जो समय बीत गया वो कल था। मतलब वह अतीत होता है। हमारे हाथों में केवल वर्तमान है और कल कुदरत के हाथों में है। इसलिए केवल वर्तमान में ही रहे, जो आज है।

कल की चिंता करना कठिनाइयों का कारण बनता है। इसलिए, जब कल जेसी कोई चीज़ ही नहीं है, तो कल कि चिंता करने की कोई करूरत ही नहीं रहती।

जब कल है ही नहीं, तो हम पेहले से टिकट क्यों खरीदें?

हम योजना बनाते हैं, की 25 तारीख को हमें मुंबई जाना है, और 28 को बड़ौदा जाना है और टिकट निकलवाते है। कभी-कभी यह नहीं भी होता है, यह सिर्फ आपकी द्रष्टि में होता है और आपकी द्रष्टि में स्पष्ट रूप से नहीं होता है। आप इसे “धुंधली द्रष्टि” के माध्यम से देखते है, जबकि “यथार्थ द्रष्टि” में आप स्थिर रह सकते हैं और स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। नियम यह है, की आपके पास एक निश्चित सीमा तक ही स्पष्ट द्रष्टि होती है, और यदि आप उससे आगे जाते हैं तो आप कुछ समय तक ठोकर खायेंगे। इसलिए उस चीज़ को मत देखो, जिसको देखने की आपको जरुरत नहीं हैं। यदि आप घड़ी को देखते रहेंगे तो आप जरुर ही ठोकर खा सकते है। इसलिए, इस दृष्टि के माध्यम से,आप जीवन के राह पर केवल एक निश्चित दूरी तक ही देखें।

अगर मैं भविष्य के बारे में चिंता करना बंद कर दूँ, तो क्या मेरी जरूरतें पूरी होगी?

समय आने पर प्रकृति सभी की जरूरतों को पूरा करती है। लेकिन लोग अनजाने में प्रक्रति को कोस कर अपने लिए अडचने पैदा करते है। अच्छी तरह इस्त्री किए हुवे कपड़े पहना हुवा व्यक्ति है और उसके कपड़ों पर बारिश गिर जाये, तो वह प्रकृति को कोसेगा। कुछ लोग चाहते हैं कि उनकी बेटी की शादी के दिन बारिश न हो, लेकिन किसान उत्सुकता से बारिश होने का इंतजार करते हैं। जब इस तरह के विरोधाभास होते हैं, तो वह प्रकृति के कार्यों में अड़चन डालते है। यह ब्रह्मांड आपकी भावनाओं और प्रकृति के विभिन्न चरणों के बीच के समायोजन के अनुसार कार्य करता है। इसलिए प्रकृति के काम में खलल न डालें। आपको सब स्वाभाविक और अनायास से प्राप्त हो जाएगा। क्या लोग कभी इस बात की चिंता करते हैं कि क्या कल सूर्योदय होगा या नही होगा? अगर वे इसकी चिंता करने लगे तो क्या होगा? ‘दखल’ करने का कोई अंत नहीं हैं। इसलिए प्रकृति के कामो के दखल न करें।

कल के लिए योजना बनाते समय, मेरी क्या भूमिका होनी चाहिए? 

  • भविष्य पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। जब सभी संयोग एक साथ मिलते हैं, तभी कोई घटना घटती है। लेकिन आप कार्य को पूरा करने के लिए जरुरी सभी संयोगो में से एक एविडेन्स हैं। यदि आप इच्छुक हो तो आपके संयोग मजबूत होंगे। इसीलिए कहा जाता है, "जहां चाह, वहाँ राह।"
  • आपके सामने खड़े हो रहे उन विभन्न संयोगो को देखें, और उस दिशा में अपने सारे प्रयास लगाएँ। प्रकृति का नियम है कि जब आप कोई चिंता नहीं करते हैं तो आप कुदरत के कामो में बाधा खड़ी करना बंध कर देते है।
  • हमें एक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए कि हमारे रस्ते में जो भी आए, उसे हम स्वीकार कर सके। आपके साथ जो कुछ भी होता है वह 'यथार्थ' हैं, उसे स्वीकार करें।
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