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क्रोध क्या है? क्रोध खतरनाक क्यों है?

क्रोध यानी खुद अपने घर को आग लगाना। खुद के घर में घास भरी हो और दियासलाई जलाए, उसका नाम क्रोध। अर्थात् पहले खुद जलता है और बाद में पड़ौसी को जलाता है।

घास के बड़े-बड़े गट्ठर किसी के खेत में इकट्ठे किए हो, लेकिन एक ही दियासलाई जलाने पर क्या होगा?

प्रश्नकर्ता : जल जाएगा।

दादाश्री : उसी तरह ही एक बार क्रोध करने पर, दो साल में जो कमाया हो, वह मिट्टी में मिल जाता है। क्रोध यानी प्रकट अग्नि। उसे खुद को पता नहीं चलता कि मैंने मिट्टी में मिला दिया। क्योंकि बाहर की चीज़ों में कोई कमी नहीं आती, लेकिन भीतर सब खत्म हो जाता है। अगले जन्म की जो सभी तैयारियाँ होगी न, उनमें से थोड़ा खर्च हो जाता है। और फिर ज़्यादा खर्च हो जाए तो क्या होगा? यहाँ मनुष्य था, तब रोटी खाता था फिर वहाँ चारा (घास) खाने (जानवर में) जाना पड़ेगा। यह रोटी छोड़कर चारा खाने जाना पड़े, वह अच्छा कहलाएगा?

वर्ल्ड में कोई मनुष्य क्रोध को नहीं जीत सकता। क्रोध के दो रूप हैं, एक कढ़ापा (कुढ़न) और दूसरा, अजंपा (बेचैनी के रूप में) जो लोग क्रोध को जीतते हैं, वे कुढ़ापा को जीतते हैं। इसमें ऐसा रहता है कि एक को दबाने जाए, तो दूसरा बढ़ेगा और कहे कि 'मैंने क्रोध को जीता', तो फिर मान बढ़ेगा। वास्तव में, क्रोध को पूर्णतया जीता नहीं सकता। दृश्य (जो दिखाई दे वैसा है) क्रोध को जीता, ऐसा कहा जाएगा।

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