
‘एवरीव्हेर एडजस्ट’, हो जाए तब वीतरागों की बात को पूर्णत: पा लिया, ऐसा कहा जाएगा।
— परम पूज्य दादा भगवानमतभेद होने पर झगड़े होते हैं। मनभेद होने पर ‘डिवॉर्स’ होता। तनभेद होने पर अर्थी निकलती है।
— परम पूज्य दादा भगवानअनंत जन्मों तक भटकने के बाद कहीं जाकर मनुष्य जन्म मिलता है। उसमें कमर दर्द करे, परोसी हुई थाली भी न खाने दें, ऐसे अंतराय होते हैं! ऐसा है यह सब! इसलिए सोच-समझकर कदम उठाना।
— परम पूज्य दादा भगवान‘मॉरल’ अर्थात् खुद के हक़ का और जो सहज रूप से मिल जाए, उतनी सभी चीज़ें भोगने की छूट! ‘मॉरेलिटी’ का यह सब से अंतिम अर्थ है!
— परम पूज्य दादा भगवानजो हमें दु:खों से मुक्त करें, वे ‘ज्ञानी’। जो दु:ख में वृद्धि करें वे ज्ञानी नहीं हैं।
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