
सामने वाले के दोष दिखाई देने से कर्म बंधन होता है और खुद के दोष दिखाई देने पर कर्म छूटते हैं!
परम पूज्य दादा भगवानचिंता होने लगे तो समझना कि कार्य बिगड़ने वाला है और चिंता नहीं हो तो समझना कि नहीं बिगड़ेगा। चिंता कार्य के लिए अवरोधक है!
परम पूज्य दादा भगवानचिंता ही संसार का सब से बड़ा बीज है। क्योंकि चिंता सब से बड़ा अहंकार है। अहंकार चला गया तो चिंता गई।
परम पूज्य दादा भगवानइस जगत् में दो तरह के लोगों की चिंता मिटती है। एक, ज्ञानी पुरुष और दूसरा, परोपकारी की।
परम पूज्य दादा भगवानपैसों से ही ‘ऑब्लाइज़’ किया जा सके, ऐसा नहीं है। वह तो देने वाले की शक्ति पर आधारित है। सिर्फ मन में भाव रखने हैं कि, ‘कैसे मैं ऑब्लाइज़ करूँ’, इतना ही रहा करे, बस वही देखना है।
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