
मतभेद का अर्थ क्या है? दीवार से टकराना। अपने सिर पर लग जाए तो वह दीवार का दोष है या अपना?
परम पूज्य दादा भगवानजितने आपसे मतभेद होते हैं उतनी ही आपकी निर्बलता। लोग गलत नहीं हैं। कोई जान-बूझकर करता ही नहीं है। आपको तो माफी माँग लेनी चाहिए कि, ‘मेरी भूल है’।
परम पूज्य दादा भगवानइस तरह घर में मतभेद होंगे तो कैसे चलेगा? पत्नी कहती है कि, ‘मैं आपकी हूँ’ और पति कहता है कि, ‘मैं तेरा हूँ’, फिर मतभेद क्यों?
परम पूज्य दादा भगवानमतभेद होने पर झगड़े होते हैं। मनभेद होने पर ‘डिवॉर्स’ होता। तनभेद होने पर अर्थी निकलती है।
परम पूज्य दादा भगवानइकट्ठे रहकर, (संयुक्त कुटुंम्ब में), मतभेद रखने के बजाय मेल-जोल सहित अलग रहना अच्छा!
परम पूज्य दादा भगवानजहाँ मतभेद होने लगे, वहाँ हमें अपने शब्द वापस ले लेने चाहिए, यह समझदार पुरुषों की निशानी है।
परम पूज्य दादा भगवानएकाग्रता तो कैसी होनी चाहिए? उठते-बैठते, खाते-पीते, लड़ते-झगड़ते हुए भी एकाग्रता टूटनी नहीं चाहिए। पूरे शरीर में अन्य कोई मतभेद ही नहीं!
परम पूज्य दादा भगवानयह सारा भेद जो हो गया है, द्रव्य-क्षेत्र-काल और भाव अलग-अलग होने की वजह से भेदबुद्धि खड़ी हो गई है!
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