
व्यवहार चरित्र यानी किसी भी स्त्री को दुःख न हो इस तरह व्यवहार करना, किसी स्त्री की ओर दृष्टि न बिगड़े।
परम पूज्य दादा भगवानसंसार की सभी चीज़ें अधोगामी हैं। सिर्फ वीर्य ही, यदि निश्चय किया जाए तो ऊध्र्वगामी हो सकता है!
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