
जब तक जगत् दोषित दिखाई देगा तब तक भटकते रहना पड़ेगा और जब जगत् निर्दोष दिखाई देगा तब अपना छुटकारा होगा।
परम पूज्य दादा भगवानआपके पास निर्दोष दृष्टि हो तो आप उससे देखो। वर्ना अन्य कुछ देखना ही मत। अन्य कुछ देखोगे तो मारे जाओगे। जैसा देखोगे वैसे ही बन जाओगे!
परम पूज्य दादा भगवानवीतरागों ने जगत् को निर्दोष देखा। फिर भला दोष निकालने वाले हम कैसे अक्लमंद? भगवान से भी ज़्यादा अक्लमंद?
परम पूज्य दादा भगवानसंसार अर्थात् राग-द्वेष वाली दृष्टि, जबकि वीतराग दृष्टि से मोक्ष है। वीतराग दृष्टि का मापदंड क्या है? यही कि पूरा जगत् निर्दोष दिखाई दे।
परम पूज्य दादा भगवानमतभेद का अर्थ क्या है? दीवार से टकराना। अपने सिर पर लग जाए तो वह दीवार का दोष है या अपना?
परम पूज्य दादा भगवानअपने दृष्टि दोष को जो कम करे, वही धर्म है। जो दृष्टि दोष को बढ़ाए, वह अधर्म है। यह संसार दृष्टि दोष का ही परिणाम है।
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