
सांसारिक विचार घुस गए हैं। उन्हें वापस निकाल दिया जाए तो केवलज्ञान! जितना लिया है, उतना वापस दे दिया तो केवलज्ञान! केवलज्ञान अर्थात् क्या? जितना लिया, उतना दे देना! इतनी सी बात है!
परम पूज्य दादा भगवानहमारे विचार किसी से मिलते-जुलते हों तो वह बहुत जोखिम भरा है। विचार मिलते-जुलते हों ऐसा ज़रूरी नहीं है, समझ होनी चाहिए। विचार मोक्ष में नहीं ले जाते हैं, समझ मोक्ष में ले जाती है!
परम पूज्य दादा भगवानपाशवता यानी बिना ह़क का लेना, बिना ह़क का खा जाना, बिना ह़क का इकट्ठा करने के विचार करना। ह़क का हमारे पास आए, तो उसमें कोई हर्ज नहीं है।
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