
हमारे कारण सामनेवाले को परेशानी हो, ऐसा बोलना सब से बड़ा गुनाह है। किसी ने ऐसा उल्टा कहा हो तो उसे दबा देना चाहिए, वही इंसान कहलाता है!
परम पूज्य दादा भगवानसामनेवाला का ‘व्यू पोइन्ट’ क्या है, उसे समझकर बोलो। खुद की दृष्टि से तोलकर या जोड़कर बोलना गुनाह है।
परम पूज्य दादा भगवानसामनेवाले की निंदा करना उसकी आराधना की निंदा करने के बराबर है। वह भयंकर गुनाह है। आप सामनेवाले को समर्थन न दे सको तो कोई बात नहीं, लेकिन निंदा तो करना ही नहीं। यदि निंदा है तो वहाँ वीतरागों का विज्ञान नहीं है, वहाँ धर्म है ही नहीं, अभेदता है ही नहीं!
परम पूज्य दादा भगवानकिसी की भी फरियाद करेगा तो तू फरियादी हो जाएगा और सामनेवाला अभियुक्त बन जाएगा। फरियाद तो किसी की भी करनी ही नहीं चाहिए। जो फरियाद लेकर आए उसी का गुनाह है ऐसा पहले ही समझ जाना, अभियुक्त की बात तो बाद में!
परम पूज्य दादा भगवानये तो आँखों के चमकारे हैं। नज़र पड़ते ही चित्त चिपक जाता है! उसमें आँखों का क्या दोष? मन का भी क्या दोष? हम कमज़ोर हैं, तभी तो मन चढ़ बैठता है न? गुनाह हमारा ही है।
परम पूज्य दादा भगवानsubscribe your email for our latest news and events
