
किसी को दु:ख हो, ऐसा वातावरण उत्पन्न करने से हमें क्लेश उत्पन्न हो जाता है।
परम पूज्य दादा भगवानसामने वाला व्यक्ति भूल करके आए, उसकी कीमत नहीं है लेकिन क्लेश हो जाए तो उसकी बहुत कीमत है। जहाँ क्लेश है वहाँ भगवान का वास नहीं है।
परम पूज्य दादा भगवानबाहर का झगड़ा एकावतारी है जबकि अंदर का झगड़ा सौ-सौ जन्मों, लाख-लाख जन्मों तक चलता रहता है!
परम पूज्य दादा भगवानकैसी स्टेज प्राप्त होनी चाहिए? ‘अपनी ऐसी बुद्धि उत्पन्न हो जानी चाहिए कि अपने घर में क्लेश कभी भी नहीं हो।’ बाकी सब चलेगा लेकिन अंतरक्लेश नहीं होना चाहिए।
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