
पैसों से ही ‘ऑब्लाइज़’ किया जा सके, ऐसा नहीं है। वह तो देने वाले की शक्ति पर आधारित है। सिर्फ मन में भाव रखने हैं कि, ‘कैसे मैं ऑब्लाइज़ करूँ’, इतना ही रहा करे, बस वही देखना है।
परम पूज्य दादा भगवानभगवान कहते हैं कि मन-वचन-काया और आत्मा (प्रतिष्ठित आत्मा) का उपयोग औरों के लिए कर। फिर तुझ पर कोई भी दु:ख आए तो मुझे बताना।
परम पूज्य दादा भगवानभगवान कौन हैं? जो शरीर होने के बावजूद भी शरीर के मालिक नहीं हैं, मन के मालिक नहीं हैं, वाणी के मालिक नहीं हैं, किसी भी चीज़ के मालिक नहीं हैं, वे इस जगत् में भगवान हैं!
परम पूज्य दादा भगवानमन की शांति, वह मनोवैभव है। मनोवैभव, वह ‘टेम्परेरी एडजस्टमेन्ट’ है। आत्मशांति, वह आत्मवैभव है और आत्मवैभव ‘परमानेन्ट एडजस्टमेन्ट’ है।
परम पूज्य दादा भगवानमतभेद होने पर झगड़े होते हैं। मनभेद होने पर ‘डिवॉर्स’ होता। तनभेद होने पर अर्थी निकलती है।
परम पूज्य दादा भगवानदेह की सभी क्रियाओं में अज्ञानी का आत्मा भी जुदा रह सकता है। यहाँ पर खाना खा रहा होता है लेकिन खुद होता है ‘ऑफिस’ में! मन की क्रिया से और वाणी की क्रिया से अलग नहीं रह पाता!
परम पूज्य दादा भगवान‘ज्ञानी’ की आज्ञा मन का शुद्धिकरण करती है। ‘स्वरूप’ का ज्ञान मन को कैसे भी संजोगों में समाधान देगा।
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