
जिसका उपाय नहीं है, उसकी चिंता कैसी? मृत्यु का उपाय नहीं है। तभी तो, कोई उसकी चिंता करता है क्या?
— परम पूज्य दादा भगवानबच्चे पर आप चिढ़ जाते हों तो उसे नया ‘लोन’ लेना कहा जाएगा। पुराना लोन तो अभी तक चुकाया नहीं! चिढ़ना तो ‘कॉन्ट्रैक्ट’ से बाहर, ‘एक्स्ट्रा आइटम’ कहा जाएगा। इसी से नया उधार चढ़ाता जाता है।
— परम पूज्य दादा भगवानजगत् मारने से नहीं सुधरता, डाँटने से या चिढ़ने से कोई नहीं सुधरता। करके बताने से सुधरता है। जितना भी बोलते हो उतना पागलपन है।
— परम पूज्य दादा भगवानयह कुदरत एक क्षण के लिए भी न्याय से बाहर नहीं गई है। कुदरत यदि एक क्षण के लिए भी न्याय से बाहर चली जाए, तो वह कुदरत नहीं है।
— परम पूज्य दादा भगवान‘कभी भी किसी के साथ टकराव में नहीं पड़ना’ - यह मोक्ष जाने की सब से बड़ी चाबी है।
— परम पूज्य दादा भगवानवीतरागों ने किस आधार पर जगत् को निर्दोष देखा? क्योंकि सभी लोग कर्मों के अधीन हैं।
— परम पूज्य दादा भगवानजब तक जगत् दोषित दिखाई देगा तब तक भटकते रहना पड़ेगा और जब जगत् निर्दोष दिखाई देगा तब अपना छुटकारा होगा।
— परम पूज्य दादा भगवानअंतिम प्रकार की जागृति कौन सी है कि इस जगत् में कोई दोषित ही न दिखाई दे!
— परम पूज्य दादा भगवानजिसे खुद के दोष देखने हैं, सामने वाले के दोष नहीं देखने हैं, उस पर इस जगत् में कोई ऊँगली नहीं उठा सकता।
— परम पूज्य दादा भगवानsubscribe your email for our latest news and events
